
Child Marriage: छत्तीसगढ़ के रायपुर में वर्ष 2028-29 तक राज्य को पूरी तरह से बाल विवाह मुक्त करने की कवायद में राज्य सरकार जुट गई है। राज्य सरकार ने राज्य को बाल विवाह से मुक्त करने के संकल्प के तहत अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया है। अक्षय तृतीया 30 अप्रैल को विवाह आयोजनों में बाल विवाह की संभावना को देखते हुए राज्य शासन ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
शासन ने सभी संबंधित विभागों, पंचायत प्रतिनिधियों और समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियों से सहयोग की अपील की है। यदि किसी को बाल विवाह की सूचना मिले तो तत्काल बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी, जिला बाल संरक्षण अधिकारी, नजदीकी थाना प्रभारी, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, महिला हेल्पलाइन 181 या आपातकालीन सेवा 112 पर जानकारी देने का अनुरोध किया गया है।
सचिव महिला एवं बाल विकास विभाग शमी आबिदी ने बाल विवाह रोकने के लिए सभी कलेक्टरों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों, जिला एवं जनपद पंचायत के मुय कार्यपालन अधिकारियों और विभागीय अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों में कहा गया है कि विवाह समारोहों में कानून का उल्लंघन करने पर वर-वधु के अभिभावक, सगे-संबंधी, बाराती और विवाह संपन्न कराने वाले पुरोहितों पर भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मुयमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में 10 मार्च 2024 को बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान की शुरुआत की गई थी, जिसका लक्ष्य वर्ष 2028-29 तक राज्य को पूरी तरह से बाल विवाह मुक्त बनाना है। बाल विवाह को न केवल सामाजिक अभिशाप, बल्कि एक गंभीर कानूनी अपराध भी माना गया है।
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत, 21 वर्ष से कम आयु के पुरुष एवं 18 वर्ष से कम आयु की लड़की के विवाह को दंडनीय अपराध घोषित किया गया है, जिसमें दो वर्ष तक की सजा अथवा एक लाख रुपए तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
Published on:
29 Apr 2025 11:34 am
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