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कम समय में इन्वेस्टमेंट को करने वाले थे डबल, लोगों ने लालच में कर दिए करोड़ों जमा और फिर…

कम समय में अधिक रकम कमाने के लालच में फंसाकर सैकड़ों लोगों की जमा पूंजी को लूटने वाले दो चिटफंड कंपनियों का भांडा फूटा।

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कम समय में इन्वेस्टमेंट को करने वाले थे डबल, लोगों ने लालच में कर दिए करोड़ों जमा और फिर...

रायपुर. कम समय में अधिक रकम कमाने के लालच में फंसाकर सैकड़ों लोगों की जमा पूंजी को लूटने वाले दो चिटफंड कंपनियों का भांडा फूटा।आरोपियों ने अलग-अलग राज्यों में ब्रांच खोलकर करीब एक हजार करोड़ रुपए की ठगी की है।छत्तीसगढ़ में करीब 25 करोड़ रुपए की ठगी की है।आरोपियों ने निवेश के पैसे से अलग-अलग हिस्सों में 75 एकड़ जमीन खरीदी है।

एसएसपी अमरेश मिश्रा ने बताया कि छत्तीसगढ़ के अलग-अलग शहरों में कीम इफ्रास्ट्रक्चर एवं डेवलपर्स लिमिटेड कंपनी और नेक्टर कमर्शियल गु्रप ऑफ कंपनी ने कार्यालय खोलकर जमीन में निवेश का प्लान बनाया। लोगों को इसमें निवेश करने पर 6 साल 3 माह में दोगुना राशि, एफडी पर मासिक आय, ज्यादा ब्याज, दुर्घटना बीमा आदि का लालच दिया।

कंपनी के अधिकारियों के झांसे में आकर लोगों ने लाखों रुपए जमा किया और पॉलिसी लिया। लेकिन पॉलिसी परिपक्व होने के बाद भी निवेशकों को दोगुनी राशि नहीं दी गई और न ही मासिक आय दी गई। इसके बाद कंपनी के अधिकारी कार्यालय बंद कर फरार हो गए। पीडि़तों ने इसकी शिकायत पुलिस से की।इसके बाद पुलिस ने कंपनी के सीएमडी अमृतसर पंजाब निवासी रविंदर सिंह सिद्धू और कंपनी के डायरेक्टर खजान सिंह व मैनेजर नरेंद्रर सिंह को गिरफ्तार कर लिया है।

आरोपियों ने छत्तीसगढ़ में 2007 में जाल बिछाया और वर्ष 2016 तक सक्रिय रहे।इसके बाद फरार हो गए। निवेशक आरोपियों के चक्कर काटते रहे। निवेश के लिए ग्राहक ढूंढने के लिए बड़ी संख्या में एजेंट नियुक्त किए थे। एजेंटों को अधिक निवेश कराने का टारगेट देते थे। हर टारगेट पर बाइक, कार इनाम के तौर पर दिया जाता था।

आरोपियों ने रायपुर में शकुंतला कॉम्पलेक्स नर्मदापारा में ऑफिस खोला था।भीमशंकर साहू, श्रवण कुमार, अंशु यादव, प्यारेलाल साहू, लालचंद साहू आदि से लाखों रुपए निवेश कराया था। सभी को तय समय पर दोगुनी रकम नहीं मिली। इसकी शिकायत करने कंपनी के ऑफिस पहुंचे, तो वहां आरोपियों ने धोखे से उनके बांड पेपर रख लिए और बताया कि उनकी राशि जमीन पर निवेश की गई है। पीडि़त उसके झांसे में रहे, लेकिन उन्हें रकम नहीं मिली। आरोपियों ने रायपुर के अलावा दुर्ग और राजनांदगांव में ऑफिस खोला था।

आरोपियों ने दोनों कंपनियों के माध्यम से धोखाधड़ी का कारोबार ग्वालियर में पहले शुरू किया। इसके बाद छत्तीसगढ़, राजस्थान, ओडिशा, पंजाब, हरियाणा सहित महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों में ऑफिस खोलकर कारोबार फैलाया। आरोपियों ने पंजाब में सबसे ज्यादा 400 करोड़ रुपए कमाया है। छत्तीसगढ़ में भी करीब 25 करोड़ रुपए जमा करवाया है। आरोपियों के खिलाफ सबसे पहले मामला ग्वालियर में ही वर्ष 2011 में दर्ज हुआ था।

मध्यप्रदेश में ग्वालियर, मुरैना, भिंड, कश्मीर में जम्मू, छत्तीसगढ़ में राजनांदगांव, रायपुर, राजस्थान में गंगानगर, हरियाणा में अंबाला, सिरसा और गुजरात में भावनगर में अभी तक कंपनी के खिलाफ एफआइआर हुई है।

कंपनी ने छत्तीसगढ़ में अभनपुर के बेंद्री में 3 एकड़, तिल्दा में 14 एकड़, बागबाहरा में 55 एकड़, अभनपुर के गातापार में 3 एकड़ जमीन खरीदी है।