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कंडेल नहर सत्याग्रह के सूत्रधार बाबू छोटेलाल सिरीवास्तव

सितम्बर 1920 के पहिली सप्ताह म पंडित सुंदरलाल सरमा, नारायनलाल मेघावाले अउ बाबू छोटेलाल सिरीवास्तव मिल के कंडेल गांव म बइठका राखिन अउ सत्याग्रह आंदोलन ल बड़े करे के निरनय लिस। जेकर ले अंगरेजी सरकार के अत्याचार अउ बाढ़े लगिस। सत्याग्रहीमन गांधीजी ल चि_ी लिख के नहर सत्याग्रह म भाग ले बर बुलावा भेजिन।

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कंडेल नहर सत्याग्रह के सूत्रधार बाबू छोटेलाल सिरीवास्तव

कंडेल नहर सत्याग्रह के सूत्रधार बाबू छोटेलाल सिरीवास्तव

छत्तीसगढ़ के कोरा म बसे बिलाई माता के धाम धमतरी ले रायपुर रोड म 4 कोस के दूरिहा म कंडेल नहर सत्याग्रह के सूत्रधार बाबू छोटेलाल सिरीवास्तव के गांव कंडेल बसे हे। जिहां 28 फरवरी 1889 के कंडेल के एक सम्पन्न परिवार म जनम होइस। बाबू छोटे लाल सिरीवास्तव दृढ़ता अउ संकल्प के परतीक स्वतन्त्रता सेनानी रिहिस। जेन ह कंडेल नहर सत्याग्रह आंदोलन करिस। ए आंदोलन म बाबू छोटेलाल सिरीवास्तव अंगरेजी सरकार के पुरजोर विरोध करिन अउ बढ़ -चढ़ के भाग ले रिहिस। जेकर सेती कंडेल नहर सत्याग्रह के सूत्रधार कहे जाथे।
पंडित सुंदरलाल सरमा अउ नारायन लाल मेघावाले के संग म आके बाबू छोटेलाल सिरीवास्तव रास्टरीय आंदोलन म सामिल होइस। कंडेल नहर सत्याग्रह छत्तीसगढ़ के इतिहास के परमुख घटना रहिस। ये कहना गलत नइ होही की छत्तीसगढ़ म रास्टरीय चेतना कंडेल नहर सत्याग्रह से होइस। बाबू छोटेलाल सिरीवास्तव के नहर सत्याग्रह आंदोलन म सामिल होय बर गांधीजी पहिली बेरा धमतरी आइस। धमतरी के नवा पीढ़ी ल तरासे म बाबू छोटेलाल सिरीवास्तव के अहम भूमिका रिहिस।
अंगरेजी सरकार माडम सिल्लीबांध म नहर ले सिंचाई करे बर किसानमन ल पानी देवय। जेकर बदला म अंगरेजी सरकार किसानमन ले लगान वसूल करय। किसानमन लगान घलो देवत रहिन। फेर, अंगरेजी सरकार किसानमन ल दस बछर के करार करे बर जब मजबूर करिन। तब किसानमन विरोध करिस। काबर कि दस बछर के करार के पइसा अतेक जादा होत रिहिस कि उही पइसा ले तो गांव म बड़े जन सिंचाई करे बर तरिया बनाए जा सकत रिहिस। ऐकर सेती किसानमन दस बछर के करार करे बर मना कर दिस। जेकर ले अंगरेजी सरकार ल ठेस पहुंचिस।
कंडेल गांव म बाबू छोटेलाल सिरीवास्तव के पुरखौती ज़मीन रिहिस। किसानमन बाबू छोटे लाल सिरीवास्तव के अगुवाई म अंगरेजी सरकार संग दस बछर के करार करे बर मना कर दिस।
अंगरेजी सरकार किसानमन के आड़ म बाबू छोटेलाल सिरीवास्तव ले बदला लेना चाहत रिहिस। वोहा गांव के सबो किसानमन ल एकजुट करके अंगरेजी हुकूमत के खिलाफ आंदोलन करें के निरनय लिस। गांव-गांव म जनसभा अउ बइठका कर के अंगरेजी सरकार के खिलाफ आवाज ल ऊंचा करिस।
दस बछर के करार नइ करे अउ लगान नइ देय के सेती अंगरेजी सरकार किसानमन ऊपर जुरमाना लगा दिस। जुरमाना नइ दे सके म अंगरेजी सरकार किसानमन के गाय-गरुमन ल जपत करे के कुरकी आदेस जारी करिस। गांव के जम्मो गाय-गरुमन ल जपत घलो कर डारिन अउ जपत करके धमतरी के बइला बाज़ार म नीलामी करे बर रखे रहिन। फेर, कोनो मनखेमन हर बोली नइ लगइन।
अंगरेजी सरकार गाय गरु-मन ल दूसर बाजार म नीलामी करे के कोसिस करिस। दूसर बाज़ार म घलो कोनो बोली लगइया नइ मिलिस। काबर के सबो मनखे ह अंगरेजी सरकार के चाल ल जानत रिहिन।
अंगरेजी सरकार के सामने दूसर समस्या ये आइस कि जपत करे गाय-गरु के दाना-पानी के बेवस्था नइ कर सके ले गाय-गरुमन बीमार होय लगिस। देखते-देखत म आंदोलन ल चलत पांच महीना होगे। ए डहर दूनों पक्छ ह झुके बर तियार नइ रिहिस।
सितम्बर 1920 के पहिली सप्ताह म पंडित सुंदरलाल सरमा, नारायनलाल मेघावाले अउ बाबू छोटेलाल सिरीवास्तव मिल के कंडेल गांव म बइठका राखिन अउ ये बइठका म सत्याग्रह आंदोलन ल बड़े करे के निरनय लिस। जेकर ले अंगरेजी सरकार के अत्याचार ह दिनोदिन अउ बाढ़े लगिस।
सत्याग्रही मन गांधीजी ल चि_ी लिख के अंगरेजी सरकार के अत्याचार ल बतइन अउ नहर सत्याग्रह म भाग ले बर बुलावा भेजिन। गांधीजी किसानमन के आंदोलन ले परभावित होके साथ देय बर तियार होगे।
21 दिसम्बर 1920 म गांधीजी के धमतरी आगमन होइस। अंगरेजी सरकार आंदोलन ल बडक़ा होवत देख घबराय लगिस अउ जपत गोधन ल वापस करे बर तियार होइस अउ जुरमान लेवत रहिन वोमा तुरते रोक लगाइन। किसानमन के नहर सत्याग्रह आंदोलन ह बाबू छोटेलाल सिरीवास्तव के अगुवाई म सफल होइस।
गांधीजी बाबू छोटेलाल सिरीवास्तव के पीठ थपथपइस अउ सत्य, अहिंसा के मारग म चले के सन्देसा दिस। अंगरेजी सरकार के अत्याचार अउ अन्याय के विरोध करइया किसानमन के हितैसी, नहर सत्याग्रही के सूत्रधार करइया। जेन ल तियागी तपस्वी अउ करमवीर के नाम ले घलो जाने जाथे। ऐसन रिहिस महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबू छोटेलाल सिरीवास्तव।

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