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सितार और तबला वादन के साथ पण्डित विष्णु कृष्ण जोशी जन्म शताब्दी समारोह का समापन

कलाकारों का पद्मश्री स्वामी जी.सी.डी., विनोद शेष आदि ने स्वागत करते हुए उन्हें स्मृति चिन्ह प्रदान किया। सितार वादक शर्मा के साथ तबले पर संगत की कोलकाता के युवा वादक रूपक भट्टाचार्य ने। आज के कार्यक्रम की विशेषता थी दूसरे चरण में रूपक भट्टाचार्य का स्वतंत्र वादन।

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सितार और तबला वादन के साथ पण्डित विष्णु कृष्ण जोशी जन्म शताब्दी समारोह का समापन

सितार और तबला वादन के साथ पण्डित विष्णु कृष्ण जोशी जन्म शताब्दी समारोह का समापन

रायपुर द्य रायपुर। पिछले तीन दिनों से जारी पण्डित विष्णु कृष्ण जोशी जन्म शताब्दी समारोह का समापन मंगलवार को सितार और एकल तबला वादन के साथ हुआ। दोनों कलाकारों को श्रोताओं ने भरपूर सराहा। रोज़ की तरह आज भी रंगमन्दिर सभागार में इसका आनन्द उठाने बड़ी संख्या मे संगीत प्रेमी उपस्थित थे। पंडित जोशी के चित्र के समक्ष कलाकारों सहित आयोजन समिति के संरक्षक डॉ. विजय जोशी, अध्यक्ष अजय तिवारी और सचिव सुधांशु शेखर शुक्ला ने दीप प्रज्वलित कर आरम्भ में इसका औपचारिक शुभारम्भ किया। कलाकारों का पद्मश्री स्वामी जी.सी.डी., विनोद शेष आदि ने स्वागत करते हुए उन्हें स्मृति चिन्ह प्रदान किया। सितार वादक शर्मा के साथ तबले पर संगत की कोलकाता के युवा वादक रूपक भट्टाचार्य ने। आज के कार्यक्रम की विशेषता थी दूसरे चरण में रूपक भट्टाचार्य का स्वतंत्र वादन। रूपक, पंडित अनिदो चैटर्जी के शिष्य हैं। एकल तबला वादन के दौरान रूपक ने अपनी प्रतिभा का धुंआधार परिचय दिया। उन्हें चंद्रभूषण वर्मा ने हारमोनियम पर साथ दिया।
कलाकार का बॉयोडाटा बीते कल की बात
उस्ताद विलायत खान के शागिर्द पंडित शर्मा गत 50 वर्षों से देश-विदेश में बजा रहे हैं। वे वरिष्ठतम कलाकारों में से हैं। आज उन्हें छत्तीसगढ़ में पहली बार सुना गया। कार्यक्रम का आरम्भ इस कलाकर ने सितार में राग- यमन कल्याण से किया। विलम्बित तीनताल में आगे की बंदिश बजाई। अपने वादन के पूर्व उन्होंने कहा कि कलाकार का बॉयोडाटा बीते कल की बात होता है। वह मंच पर क्या करता है यही उसकी सही पहचान हुआ करती है। इसीलिए मुझे आज जो मैं बजाने जा रहा हूँ उससे पहचाना जाए। वादन के दौरान उन्होंने गा कर भी सितार बजाया। श्रोताओं ने उन्हें भरपूर सराहा।