
सुलह में उलझा इंसाफ: सामाजिक बहिष्कार मामलों में समझौता सिर्फ कागजों पर ही, प्रताडऩा जारी है...
गौरव शर्मा @ रायपुर. सामाजिक बहिष्कार के मारे, कहां जाएं! पुलिस तो रिपोर्ट लिखती नहीं। प्रशासन और विभिन्न आयोगों में इंसाफ की गुहार लगाने के बाद भी पीडि़त दर-दर भटकने को मजबूर हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां तक पहुंचने वाली ज्यादातर शिकायतें सुलह पर आकर खत्म हो जाती है। ये समझौता भी सिर्फ कागजों पर ही होता है। प्रताडऩा बाद में भी जारी रहती है।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में सामाजिक बहिष्कार के मामले गाहे-बगाहे सामने आते रहते हैं। लोग जब इसकी एफआईआर दर्ज करवाने थाने जाते हैं तो पुलिस द्महस्तक्षेप अयोग्यद्य मामला बताकर सीधे कार्रवाई से इनकार कर देती है। इसके पीछे तर्क ये कि सामाजिक बहिष्कार के खिलाफ कोई कानून ही नहीं है। ऐसे में लोग इंसाफ पाने के लिए जिला प्रशासन, मानवाधिकार और महिला आयोग का रूख करते हैं। जब यहां से पुलिस प्रतिवेदन मंगवाया जाता है तो सुलह होने की जानकारी मिलती है। सूत्रों ने बताया कि लोकल थाना स्टाफ जब गांव के पंच-सरपंच या सामाजिक प्रतिनिधियों के पास पहुंचता है तो वे पीडि़त परिवार के साथ बैठक कर लेते हैं। इसमें समझौते पर जोर दिया जाता है। पुलिस की मौजूदगी में हुई सुलह को पीडि़त पक्ष भी मान जाता है। हालांकि, गांव से पुलिस के लौटते ही पहले जैसी प्रताडऩा शुरू हो जाती है। एक जानकारी के अनुसार प्रशासन और आयोगों के पास पहुंचने वाली 90त्न शिकायतों का यही हाल होता है। जबकि, अन्य 10% मामलों में द्मतारीख पर तारीखद्य मिलती रहती है। कुछएक अपवाद को छोड़ दें तो इनमें से भी किसी पर कार्रवाई नहीं होती।
समझौते के बाद भी बहिष्कार की दास्तां बयां करते मामले, पढि़ए...
महिला आयोग की फटकार के बाद समाज ने भी बढ़ा दी सजा
मामला नवा रायपुर के पास जौंदी गांव का है। इंटरकास्ट मैरिज करने की वजह से हुलेश साहू के साथ उसके परिवार का भी बहिष्कार कर दिया गया। दंड के तौर पर 30 हजार की राशि भी वसूली गई। 2 माह पहले उनसे इसकी शिकायत महिला आयोग में की। आयोग ने तब समाज के प्रतिनिधियों को दफ्तर बुलाकर कड़ी फटकार लगाई थी। बहिष्कार खत्म करवाने के साथ अर्थदंड की राशि भी वापस दिलवाई थी। यहां तो समाज के प्रतिनिधियों ने चुपचाप समझौते की बात स्वीकार कर ली, लेकिन गांव लौटते ही बहिष्कार की सजा को फिर बहाल कर दिया। इस बार हुलेश के बड़े पिता के परिवार को भी बहिष्कृत कर दिया गया है क्योंकि उन्होंने आयोग में शिकायत करने में उसका साथ दिया था।
एसडीएम से शिकायत पर पीटा, फिर एफआईआर भी करवा दी
क्चके अकोला गांव में रहने वाले योगेंद्र वर्मा ने मनपसंद से शादी की तो उसे गांवभर में भीख मांगने की सजा सुनाई गई। उनसे ऐसा करने से मना किया तो गांव की पंचायत ने उसका हुक्का-पानी बंद करने का फरमान सुना दिया। मामले की शिकायत एसडीएम तक पहुंची तो प्रतिनिधियों ने मान-मनौव्वल कर समझौता कर लिया। गांव जाने पर उन्हीं प्रतिनिधियों ने एक घर में बंद कर उसकी खूब पिटाई कर दी। पुलिस से इसकी शिकायत हुई तो आरोपियों को थाने ले जाया गया, लेकिन कुछ घंटे बाद ही पता चला कि पीडि़त के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर ली गई है। अब वह अपने बचाव के लिए पिछले 20 दिनों से काउंटर एफआईआर दर्ज करवाने एसपी और एसडीएम के दफ्तर के चक्कर काट रहा है।
22 परिवारों का बहिष्कार, पुलिस ने रजिस्टर से नाम काट खानापूर्ति की
धमतरी के बगदेही से भी हाल ही में एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां साहू समाज के 22 परिवारों को इसलिए बहिष्कृत कर दिया गया क्योंकि उन्होंने किसी रिश्तेदार की मृत्यु के बाद मुंडन नहीं करवाया था। पुलिस ने पहले इसे हस्तक्षेप अयोग्य मामला बताते हुए कार्रवाई करने से मना कर दिया। बहिष्कार को लेकर काम करने वाली संस्था द्मएक मानव समाजद्य जब गांव पहुंची, तब कहीं जाकर पुलिस हरकत में आई। पहले तो पंच-सरपंचों को समझाइश दी। फिर बहिष्कार का रिकॉर्ड रखने वाले रजिस्टर से उन 22 परिवारों का नाम काटकर खानापूर्ति कर दी। जानकारी मिली है कि ढाई माह बाद भी सभी परिवार बहिष्कृत हैं। मामले को लेकर कई बार स्थानीय प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
कानून ही एकमात्र विकल्प
अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने बताया कि सामाजिक बहिष्कार के खिलाफ कोई कानून नहीं है। खाप पंचायतों के मुखिया इसी बात का फायदा उठा रहे हैं। राजस्थान और महाराष्ट्र जैसा सक्षम कानून जिस दिन छत्तीसगढ़ में भी लागू हो जाएगा, बहिष्कार की समस्या भी खत्म हो जाएगी।
समझौते से ही बनेगी बात
एक मानव समाज के अध्यक्ष सुबोध देव ने बताया कि बहिष्कार मामले में पुलिस सीधे एफआईआर दर्ज नहीं करती। प्रशासन और आयोगों से होने वाली सुलह का ग्राउंड पर कोई रिजल्ट नहीं दिखता। समझौते के बजाय कार्रवाई की जाए, तब कहीं जाकर बहिष्कार पीडि़तों को इंसाफ मिलेगा।
Updated on:
11 Jul 2022 07:14 pm
Published on:
11 Jul 2022 07:07 pm
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