17 मार्च 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Computer Scam: छत्तीसगढ़ में 4.72 करोड़ का कंप्यूटर घोटाला, तीन आरोपियों के खिलाफ 1700 पन्नों का चालान पेश

Computer Scam in CG: प्रदेश के 18 जिलों के स्कूलों को कंप्यूटर दिलाने के नाम पर सरकार को 4.72 करोड़ का चूना लगाया है। मामले में ईओडब्ल्यू ने तीन आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया है..

2 min read
Google source verification
computer scam in cg

4.72 करोड़ के कंप्यूटर घोटाले में 1700 पन्नों का चालान ( Photo - Patrika )

Computer Scam in CG: ईओडब्ल्यू ने राजीव गांधी शिक्षा मिशन में कंप्यूटर की खरीदी में हुए 4 करोड़ 72 लाख 88462 रुपए के घोेटाला में फर्म संचालक आलोक कुशवाहा, अंजू कुशवाहा और संजीत साहा के खिलाफ सोमवार को चालान पेश किया। विशेष न्यायाधीश की अदालत में पेश किए गए 1700 पेज के चालान में बताया गया है कि तीनों आरोपियों ने आपराधिक षड्यंत्रपूर्वक कूटरचित एवं फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया। साथ ही एचपी एवं एग्माटेल के फर्जी एवं कूटरचित अर्थराइजेशन लेटर्स तैयार किया।

Computer Scam in CG: 18 जिलों में स्कूलों के नाम सरकार को लगाया चूना

चालान में बताया गया है कि राजीव गांधी शिक्षा मिशन रायपुर द्वारा कम्प्यूटर समर्थित योजना के तहत राज्य के 18 जिलों में शासकीय स्कूलों को एलएफडी/टीएफटी कम्प्यूटर युक्त उपकरण दिया जाना था। (Chhattisgarh) इसे दो चरणों में दो 638 नग एलएफडी/टीएफटी मानिटर्स भेजे गए थे लेकिन, आरोपियों ने निम्नस्तरीय कम्प्यूटर को वास्तविक कीमत से कई गुना अधिक कीमत पर भेजा। वहीं पेश किए गए चालान में सभी की भूमिका का विस्तृत ब्यौरा दिया गया है।

यह है मामला

राजीव गांधी शिक्षा मिशन में 15 साल पहले 2010-11 में 246 नग और 2011-12 में 392 नग कम्प्यूटर की खरीदी की गई थी। इसकी आपूर्ति मिनी इंफोटेक रायपुर संचालक आलोक कुशवाहा के द्वारा 2010-11 में 246 नग और ग्लोबल नेटवर्क सॉल्यूशन रायपुर द्वारा 2011-12 में 392 नग मानिटर्स की आपूर्ति की गयी। कम्प्यूटर सेट की बाजार में वास्तविक दर 57950 रुपए थी लेकिन इसमें इजाफा कर शासन को 1 लाख 26500 रुपए प्रति नग की दर से भेजा गया।

जांच में हुआ बड़ा खुलासा

प्रत्येक सेट में 68550 रुपए का अंतर था। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने एचपी और एग्माटेल कंपनी के फर्जी ऑथराइजेशन लेटर तैयार किए थे। इस घोेटाले में आशुतोष चावरे तात्कालीन संयुक्त संचालक, बजरंग प्रजापति तत्कालीन सहायक संचालक एवं पी. रमेश तत्कालीन सहायक संचालक के खिलाफ शिक्षा विभाग को विभागीय कार्रवाई करने के संबंध में अनुशंसा की गई है।