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रायपुर।झीरम घाटी मामले में कांग्रेस और भाजपा उस समय फिर आपस में भिड़ गए जब न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्र आयोग में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह , तत्कालीन गृहमंत्री ननकीराम कंवर, तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे और केंद्रीय गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह की गवाही कराने के लिए आवेदन की बात कही। सोमवार को सरकारी वकील ने आयोग से कहा, यह आवेदन जांच में देरी की कोशिश है। सरकार की ओर से कहा गया कि मुख्यमंत्री गवाह नहीं बनेंगे।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल ने ट्विटर पर लिखा कि अगर रमन सिंह कहते हैं कि जांच होनी चाहिए तो क्यों वे आयोग के सामने गवाही से इनकार कर रहे हैं? जब उन्होंने सीबीआई की जांच नहीं करायी, तभी से हमें पता था कि दाल में कुछ काला जरुर है।
इस नृशंस हत्याकांड में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की ही नहीं बल्कि अन्य लोगों की भी हत्या हुई थी। डॉ. रमन सिंह ने इसकी सीबीआई जांच भी नहीं होने दी। अब आयोग के कहने पर भी यूनीफाइड कमांड के प्रमुख होने के नाते इसमें पेश ना होकर सीएम आखिर क्या छुपाना चाह रहे हैं?
फिर भाजपा ने भी तोडी अपनी चुप्पी , कहा - मनमोहन-सोनिया को बुलाओ
कांग्रेस के हमले के बाद भाजपा भी सक्रिय हुई। ट्विटर पर एक पोस्टर डालकर लिखा, भूपेश बघेल झीरम घटना के समय तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी को गवाही देने के लिए पहले बुलाएं। न्यायिक आयोग को पत्र लिखें क्योंकि इन दोनों को एनआइए जांच के विषय में सबसे ज्यादा जानकारी होगी। भाजपा ने लिखा, बड़बोले भूपेश में हिम्मत है तो वे तुरंत पत्र लिखकर दिखाएं।
इस पोस्टर पर कांग्रेस ने भी जवाबी हमला बोला। छत्तीसगढ़ पीसीसी के आधिकारिक हैंडल से किए ट्विट में कहा गया, डॉ. रमन सिंह की तो हिम्मत नहीं हो रही है कि आयोग के सामने आएं और उल्टा चुनौती दे रहे हैं मनमोहन सिंह को।
Published on:
22 May 2018 02:10 pm
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