
Coronavirus : रहस्यमयी बीमारी के इलाज के लिए आखिर कैसा होता है आइसोलेशन वार्ड
रायपुर. दुनियाभर में हाहाकार मचाने वाले कोरोना वायरस ने अब तक 3,37,754 लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। वायरस से 14,441 लोगों की मौत भी हो चुकी है। लेकिन, खुशी की बात ये है कि अब तक इस संक्रमण से 96,958 लोग स्वास्थ हो भी गए है।
फिलहाल अभी भारत में 382 लोग इस वायरस से संक्रमित हो चुके है और 7 लोग अपनी जान भी गंवा दिए है। तेजी से फैलती इस रहस्यमयी बीमारी पर नियंत्रण के लिए सरकार कई स्तरों पर कोशिश कर रही है। इसी में बार-बार एक शब्द सुनाई पड़ रहा है- कोरोना आइसोलेशन वार्ड। तो आइए जानें, क्या है आइसोलेशन और अस्पताल के दूसरे कमरों से किस तरह से अलग है।
क्वेरेंटाइन और आइसोलेशन में क्या अंतर है
क्वेरेंटाइन का मतलब है, किसी ऐसे व्यक्ति को अलग-थलग रखा जाना जो किसी कोरोना मरीज के संपर्क में आ चुका हो या फिर ऐसी किसी जगह गया हो, जहां कोरोना फैल चुका है। क्वेरेंटाइन पीरियड के दौरान मरीज घर पर अलग रहता है और अपने लक्षणों पर गौर करता है। अगर सर्दी, खांसी, बुखार जैसे लक्षण दिखाई दें तो अस्पताल में जांच होती है और फिर उसे आइसोलेशन में यानी एकदम अलग कमरे में रख दिया जाता है, जहां पूरा इलाज तब तक चलता है जब तक कि रिपोर्ट निगेटिव न आ जाए।
Updated on:
23 Mar 2020 01:13 am
Published on:
23 Mar 2020 01:11 am
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