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शहर को स्मार्ट बनाने करोड़ों फूंके, अब कबाड़ हो रहे ई-टॉयलेट, ट्रैक पर साइकिल भी नहीं दौड़ी

Chhattisgarh News In Hindi : स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करोड़ों रुपए जिन कामों पर फूंके गए, उनमें से अधिकांश आखिरी सांसें गिन रहे हैं।

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शहर को स्मार्ट बनाने करोड़ों फूंके, अब कबाड़ हो रहे ई-टॉयलेट, ट्रैक पर साइकिल भी नहीं दौड़ी

शहर को स्मार्ट बनाने करोड़ों फूंके, अब कबाड़ हो रहे ई-टॉयलेट, ट्रैक पर साइकिल भी नहीं दौड़ी

रायपुर. स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करोड़ों रुपए जिन कामों पर फूंके गए, उनमें से अधिकांश आखिरी सांसें गिन रहे हैं। ऐसे कई प्रोजेक्टों पर या तो पलीता लगा दिया गया, या फिर लोगों को जागरूक नहीं कर पाए।

नतीजा, साइकिल ट्रैक पर न तो साइकिल दौड़ी और न ही स्मार्ट टॉयलेट जैसी सुविधाओं का उपयोग किए। वह अब कबाड़ हो रहा है। सड़क किनारे हो या बाजार जहां-जहां बनाए अधिकांश में ताला लटक रहा है।

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एसी बस स्टॉप कई जगह बनाए गए, परंतु बसें ही नहीं चलीं। ऐसे में कहीं बदहाल हो गए तो इनमें से कई जगह यात्रियों की बजाय मुफलिसों का रात बिताने का अड्डा बन गया है। हैरत ये कि शहर के सबसे बड़े बूढ़ेश्वर तालाब का फव्वारा बंद और वाटर स्पोर्ट्स बोटिंग का डिब्बा गोल हो चुका है।

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578 करोड़ में 430 करोड़ खर्च

रायपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए केंद्र और राज्य से 578 करोड़ रुपए मिले हैं। कंपनी ने पिछले सात सालों में छोटे-बड़े प्रोजेक्टों में करीब 430 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किया, लेकिन लोगों को किस तरह की सुविधाएं मिल रही हैं, इस पर बड़ा सवाल बना हुआ है।

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उद्देश्य तो यही था कि राजधानी के अनुरूप शहर के लोगों को स्मार्ट सुविधाएं मिलेंगी। परंतु जमीनी स्तर पर स्मार्ट सिटी जिन कामों की खूब दुहाई दी, उनमें से गौरव पथ, साइकिल ट्रैक, मोतीबाग पंप ट्रैक, भूलभुलैया, नेकी की दीवार सब पर पलीता लगा है। शहर के लगभग वाटर एटीएम का भी वैसा ही हाल है।

कहीं चालू नहीं है। इंफ्रास्ट्रक्चर वाले बड़े कामों को छोड़कर स्मार्ट सिटी के ज्यादातर छोटे-छोटे सभी कामों का फायदा शहर के आम लोगों को मिल ही नहीं पाया।

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स्मार्ट लाइटों की बत्ती गुल


शहर में दो करोड़ से अधिक खर्च कर 50 स्मार्ट लाइट पोल लगाए गए। उनमें से कई पोल की बत्ती मेंटेनेंस के अभाव में गुल हो चुकी है। ऐसा ही हॉल स्मार्ट चौपाटी का है। शहर के बीच शहीद स्मारक भवन की करीब 50 हजार वर्गफीट छत पर चौपाटी शुरू करने के दावे के साथ करीब 3 करोड़ रुपए खर्च करने का हिसाब-किताब हो गया।।

2018 में पूरी छत पर टाइल्स लगाई गई और उस पर ग्रीन कारपेट बिछाया गया। हैरानी ये कि आज तक वह चौपाटी शुरू नहीं हो पाई।

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शहर के लोगों को ज्यादा से ज्यादा अच्छी सुविधाएं मिल सकें, ऐसे कई कार्य कराए गए हैं। जागरुकता के अभाव में उपयोग नहीं करना अलग बात है। स्मार्ट कार्य की वजह से कई अवार्ड रायपुर को मिले हैं। बूढ़ातालाब के सौंदर्यीकरण पर पहले चरण में 29 करोड़ खर्च हुआ है। जिसे पर्यटन मंडल को सौंपने की प्रक्रिया चल रही है।

आशीष मिश्रा, महाप्रबंधक जनसंपर्क, स्मार्ट सिटी

शहर को स्मार्ट बनाने के लिए केंद्र सरकार से करोड़ों रुपए का फंड मिला। परंतु कार्य प्लानिंग से न कराकर जमकर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया है। इसलिए शहर के लाखों लोग सुविधाओं से वंचित हैं। केंद्रीय टीम ऐसे कई कार्यों को जांच के दायरे में लिया है। रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा।

मीनल चौबे, नेता प्रतिपक्ष, निगम