
देवउठनी एकादशी: माता तुलसी और भगवान शालीग्राम का आज होगा विवाह, अब शुरू हो जाएंगे मांगलिक कार्य
रायपुर. चातुर्मासकाल के बाद आज देव जागृत होंगे और घर-घर तुलसी पौधा चौरा पर गन्ने के मंडप सजेंगे और धूमधाम से भगवान शालीग्राम और माता तुलसी का श्रद्धापूर्वक विवाह रचाकर लोग पटाखे फोड़ कर छोटी दिवाली मनाएंगे।छत्तीसगढ़ की राजधानी के बाजार कल से ही छोटी दिवाली की तैयारियों के लिए गुलजार रहे। गन्ना की खेप, शकरकंद, सिंघाड़ा, आंवला, फल-फूल की दुकानें बाजारों से लेकर सड़कों के किनारे सजी नजर आईं। सभी जगह लोगों की भीड़ लगी रही।
इस पर्व के लिए लखोली सहित आसपास के गांवों के किसान गन्ना बेचने के लिए रायपुर पहुंचे। छोटी दिवाली को देखते हुए गन्ना 40 रुपए जोड़ा से लेकर सौ रुपए जोड़ा तक बिका, तो शकरकंद और सिंघाड़ा 40-40 रुपए किलो।चना की भाजी तो 80 से सौ रुपए तक लोगों ने खरीदी।छोटी दिवाली के लिए लोगों ने खास तैयारियों में जुटे रहे। तुलसी चौरा का साफ-सफाई, रंगाई-पुताई करने के साथ ही आकर्षक रंगोली से द्वार-द्वार दिवाली जैसे दमकेंगे।सोमवार को शाम के पहर में पति-पत्नी विधि-विधान से शुद्ध मिट्टी से भगवान सालिकग्राम और माता तुलसी की मूर्तियां बनाकर गन्ने के मंडप के नीचे रखेंगे। पूजा-अर्चना कर विधानपूर्वक पुलिस भगवान सालिकग्राम और माताएं माता तुलसी की मूर्तियां लेकर मंडप का सात बार फेरे कराकर विवाह संपन्न करेंगे।
पं. मनोज शुक्ला के अनुसार भगवान का विवाह संपन्न करने के बाद एकादशी का व्रत रखने वाले फलादि और जल ग्रहण करेंगे।कार्तिक मास की एकादशी का व्रत पूजन विशेष फलदायी और पुण्यदायी मना गाया है। इस तिथि का सनातन धर्मियों को इंतजार रहता है। देवउठनी एकादशी पर भगवान शालीग्राम का विवाह संपन्न होने के साथ ही मांगलिक कार्य प्रारंभ होते हैं।
कुम्हारी में बच्चों ने आनंद मेला का आनंद लिया। इस मौके पर कार्यक्रम का शुभारंभ रीता पांडेय एवं विद्यालय प्रबंधक जगभान यादव ने किया। इस दौरान बच्चों को खुशियों का पर्व बड़ी दिवाली हो या छोटी दिवाली जरूरतमंदों के साथ मनाने की सीख दी तथा मिट्टी के दीये का महत्व बताया।
Published on:
19 Nov 2018 09:25 am
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