
jatau shila
रायपुर . जिसने भी रामायण या रामचरित मानस पढ़ा हो या कथा सुनी हो, वे जटायु के नाम से जरूर परिचित होंगे। जी हां, जटायु वही विशालकाय पक्षी है, जिन्होंने रावण के चंगुल से सीता को छुड़ाने का प्रयास करते हुए अपना बलिदान दिया था। माना जाता है कि जिस जगह जटायु रहते थे और जहां उनका रावण से युद्ध हुआ था, वह जगह तत्कालीन कोशल प्रदेश के दण्डकारण्य और अब के छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में मौजूद है। फरसगांव के आगे करीब दो किलोमीटर दूर जगदलपुर रोड पर हाईवे 30से नीचे उतरकर दायीं ओर जंगल में 600 मीटर भीतर यह स्थान है, जिसे जटायु शिला कहते हैं।
जंगल से घिरे इस इलाके में विशालकाय चट्टान और उस पर अनेक बड़े पत्थर रहस्यमयी ढंग से एक-दूसरे से सटे या खड़ी बनावट में देखने को मिलते हैं। यहां का रास्ता कोई नहीं बताता, यहां कोई संकेतक भी नहीं लगा है। घने जंगल में खोजते हुए आगे बढऩा पड़ता है। यह जंगल में एक ऐसी जगह है, जहां दिन में भी जाने में डर लगे। लोग यहां समूह में ही जाना पसंद करते हैं।
...तो यहां आए थे भगवान राम
घने वन और मनोरम घाटी के बीच छोटी पहाड़ी पर एक सपाट-सी बहुत बड़ी शिला है। इस विशाल शिला पर अनेक विशाल पत्थर एक दूसरे से सटाकर रखे लगते हैं। देखने से ऐसा लगता है कि किसी समय जटायु जैसे बड़े पक्षियों के छिपने के लिए यह जगह गुफा की तरह इस्तेमाल होती होगी। अगर यह शिला जटायु से जुड़ी है, तो यहीं रावण से उनका युद्ध हुआ होगा और यहीं उन्होंने प्राण त्याग होंगे। रामायण में यह विवरण है कि जटायु ने राम की गोद में ही प्राण त्याग थे और भक्त जटायु का अंतिम संस्कार श्री राम और लक्ष्मण ने ही किया था।
शिला के दूसरी ओर मां दंतेश्वरी का मंदिर
जटायु शिला के दूसरी ओर खाई की दिशा में मां दंतेश्वरी का एक मंदिर भी है। इसे स्थानीय लोग मां दंतेश्वरी की छह बहनों में से एक मानते हैं, लेकिन इसे भी मां दंतेश्वरी ही कहा जाता है। यहां स्थापित प्रतिमा की खासियत यह है कि मां दंतेश्वरी रूप में विराजमान हैं। इस मंदिर में महाशिवरात्री के दिन विशेष पूजा-अर्चना होती है और यहां मेला भी लगता है। वहीं मुख्य सड़क की ओर एक शिवलिंग भी स्थापित है, जिसके लिए मंदिर निर्माणाधीन है। इस शिवलिंग को स्थानीय निवासी भैरव बाबा के तौर पर भी पूजते हैं। यहां मंदिर का निर्माण जनसहयोग से किया जा रहा है।
पोयाम परिवार पूजारी
जटायु शिला के पास ही बसे गांव में पजारी पारा है। जहां रहने वाला पोयाम परिवार जटायु शिला स्थित मां दंतेश्वरी की पूजा के लिए अधिकृत है। यही परिवार शिव मंदिर (भैरव बाबा) की पूजा भी करता है। यहां के आदिवासी जटायु शिला के बारे में सुनते जरूर आए हैं, लेकिन कोई ठोस जानकारी नहीं दे पाते हैं।
Published on:
13 Feb 2018 09:14 pm
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