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क्या आपको पता है कैसे उत्पत्ति हुई वसंत ऋतु, जानिए पौराणिक कथा

ऐसी मान्यता है कि सृष्टि के आरंभ में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने मनुष्य की रचना की, लेकिन अपने सृष्टि से वे संतुष्ट नहीं थे...

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क्या आपको पता है कैसे उत्पत्ति हुई वसंत ऋतु, जानिए पौराणिक कथा

क्या आपको पता है कैसे उत्पत्ति हुई वसंत ऋतु, जानिए पौराणिक कथा

बसंत पंचमी भारतीय त्यौहार है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। माघ मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन वसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष ये पर्व 1 फरवरी को मनाया जा रहा है। इस दिन को मां सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं। इस दिन मां सरस्वती के मंत्रों का जाप करने से ज्ञान, विद्या, बल, बुद्धि अौर तेज की प्राप्ति होती है।

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जानते हैं मां सरस्वती के उत्पत्ति की कथा…

पतझड़ के बाद बंसत ऋतु का आगमन होता है, बंसत को ऋतुओं का राजा कहा जाता है। स्वयं भगवान कृष्ण ने कहा है की ऋतुओं में मैं बसंत हूं। ऐसी मान्यता है कि सृष्टि के आरंभ में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने मनुष्य की रचना की, लेकिन अपने सृष्टि से वे संतुष्ट नहीं थे। उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है, जिसके कारण चारों ओर मौन छाया रहता है।

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विष्णु जी से सलाह लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल छिड़का। पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही उसमें कंपन होने लगा और एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई। ये शक्ति एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री का था, जिसके एक हाथ में वीणा और दूसरा हाथ वर मुद्रा में था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी।

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ब्रह्मा ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा बजाना शुरू किया, पूरे संसार में एक मधुर ध्वनि फैल गई। तब ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा।

मां सरस्वता विद्या, बुद्धि और ज्ञान प्रदान करती हैं। बसंत पंचमी के दिन इनकी उत्पत्ति हुई थी, इसलिए बसन्त पंचमी के दिन इनका जन्मदिन मनाया जाता है। इनकी विधि विधान से पूजा की जाती है और विद्या और बुद्धि का वरदान मांगा जाता है।

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मांगे बुद्ध‍ि और ज्ञान का वरदान

मां सरस्वती का संबंध बुद्धि से, ज्ञान से है। यदि आपके बच्चे का पढ़ाई में मन नहीं लगता है, यदि आपके जीवन में निराशा का भाव बहुत बढ़ गया है, तो बंसत पंचमी के दिन मां सरस्वती का पूजन जरूर करें। मां के आशीर्वाद से आपका ज्ञान बढ़ेगा और आप जीवन में सही निर्णय लेने में सफल होंगे।

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'ऎं ह्रीं श्रीं वाग्वादिनी सरस्वती देवी मम जिव्हायां। सर्व विद्यां देही दापय-दापय स्वाहा।।'

एकादशाक्षर सरस्वती मंत्र : ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः।

'वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मंगलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणी विनायकौ॥'

'सरस्वत्यै नमो नित्यं भद्रकाल्यै नमो नम:।

वेद वेदान्त वेदांग विद्यास्थानेभ्य एव च।।

सरस्वति महाभागे विद्ये कमललोचने।

विद्यारूपे विशालाक्षी विद्यां देहि नमोस्तुते।।'

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