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Chaitra Navratri 2026: डोंगरगढ़ में 24 घंटे मिलेगी चिकित्सा सुविधा, चढ़ाई और उतराई के लिए अलग रूट तय

Chaitra Navratri 2026: डोंगरगढ़ में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। स्टेशन परिसर में प्राथमिक उपचार केंद्र स्थापित किया गया है, जहां आवश्यक दवाइयों एवं उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।

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Chaitra Navratri 2026: डोंगरगढ़ में 24 घंटे मिलेगी चिकित्सा सुविधा, चढ़ाई और उतराई के लिए अलग रूट तय

डोंगरगढ़ में 24 घंटे मिलेगी चिकित्सा सुविधा (Photo Patrika)

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्र पर डोंगरगढ़ में आयोजित मां बम्लेश्वरी मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुगम आवागमन के लिए रेलवे की ओर से ट्रेन समेत अन्य व्यवस्था की गई है। इस दौरान अधिक भीड़ को देखते हुए रेलवे की ओर से स्पेशल ट्रेन व एक दर्जन करीब ट्रेन का ठहराव दिया गया है। साथ ही कई ट्रेनों को विस्तार भी किया गया है।

वहीं डोंगरगढ़ में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। स्टेशन परिसर में प्राथमिक उपचार केंद्र स्थापित किया गया है, जहां आवश्यक दवाइयों एवं उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। किसी भी आपातस्थिति से त्वरित रूप से निपटने के लिए एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई है। 24 घंटे डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की ड्यूटी होगी ताकि यात्रियों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके। स्वास्थ्यकर्मियों की अलग-अलग शिफ्टों में तैनाती की गई है।

डोंगरगढ़ में बढ़ा बदलाव

मां बम्लेश्वरी मंदिर में दर्शन व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव लागू किया है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और विशेष अवसरों पर होने वाली भारी भीड़ को देखते हुए अब चढ़ाई और उतराई के लिए अलग-अलग मार्ग निर्धारित कर दिए गए हैं। नई व्यवस्था से दर्शन व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और सुगम होने की उम्मीद जताई जा रही है।

नई व्यवस्था के तहत श्रद्धालु अब मंदिर में दर्शन के लिए क्षीरपानी की ओर से सीढ़ियों के माध्यम से ऊपर जाएंगे। वहीं दर्शन के बाद नीचे उतरने के लिए पीछे की ओर स्थित मोटल साइड से अलग मार्ग का उपयोग करेंगे। इस प्रकार अब मंदिर आने और जाने के रास्ते पूरी तरह अलग कर दिए गए हैं, जिससे भीड़ का दबाव कम होगा और आवागमन आसान बनेगा।

मंदिर जाने का रास्ता

पूर्व में क्षीरपानी के पास से ही मंदिर जाने और वहीं से लौटने का रास्ता था। एक ही स्थान से चढ़ाई और उतराई होने के कारण भीड़ का अत्यधिक दबाव बनता था। जिससे अव्यवस्था और अफरा-तफरी जैसी स्थिति निर्मित हो जाती थी। अब चढ़ाई के लिए क्षीरपानी मार्ग और उतराई के लिए पीछे मोटल साइड का अलग रास्ता निर्धारित होने से भीड़ नियंत्रित हो रही है और श्रद्धालुओं को राहत मिल रही है।

हालांकि उतराई के बाद श्रद्धालुओं को मोटल साइड से लगभग 250 मीटर पैदल चलकर मुख्य मार्ग तक पहुंचना पड़ रहा है। इस मार्ग पर धूप और बारिश से बचाव के लिए मंदिर ट्रस्ट समिति द्वारा शेड की भी व्यवस्था की गई है, जिससे श्रद्धालुओं को अतिरिक्त सुविधा मिल रही है।