
रायपुर. प्रदेश के 13 जिलों की 41 तहसीलों में सूखे का संकट कायम है। राज्य सरकार ने संबंधित जिलों के कलक्टरों के माध्यम से तत्काल रिपोर्ट भेजने के निर्देश भी दिए थे, लेकिन राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग को महज 3 तहसीलों बेमेतरा, धमधा और कवर्धा की रिपोर्ट ही मिल पाई है। ग्राउंड रिपोर्ट मिल जाने के बाद केंद्र से राहत राशि की मांग की जानी है।
देश के कई हिस्सों में जहां बारिश बाढ़ की स्थिति बनी हुई है वही छत्तीसगढ़ में हालात थोड़े उलट है। छत्तीसगढ़ में मानसून के थम जाने से किसान सूखे की मार झेल रहे हैं। इस बारे में केंद्र ने प्रदेश से सूखा प्रभावित इलाकों की रिपोर्ट मांगी थी। इस बीच राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने पिछले 26 अगस्त को राजस्व विभाग के संयुक्त सचिव नीलकंठ टेकाम, भू अभिलेख आयुक्त रमेश शर्मा और कृषि विभाग के अपर संचालक एसआर रात्रे की अगुवाई में कुल 18 अधिकारियों की एक टीम गठित की थी। इस टीम को सूखा प्रभावित तहसीलों का भ्रमण कर वास्तविक स्थिति का पता लगाने कहा गया था।
70 प्रतिशत से कम वर्षा वाली तहसील
धमधा, दुर्ग, पाटन, बेमेतरा, साजा, नवागढ़, बेरला, थान खम्हरिया, गुरूर, डौंडी, छुरिया, डोंगरगढ़, राजनांदगांव, छुईखदान, खैरागढ़, बोड़ला, आरंग, रायपुर, तिल्दा, महासमुंद, बलौदाबाजार, बिलाईगढ़, पलारी, कसडोल, सिमगा, गरियाबंद, राजिम, मैनपुर, कुरूद, नगरी, मगररोड, भानुप्रतापपुर, दुर्गकोंदल, अंतागढ़, पंखाजुर, नरहरपुर, नारायणपुर, बीजापुर।
खेतों में दरारें
रायपुर, कांकेर, बेमेतरा, दुर्ग, बालोद के अलावा कई जगह खेतों में दरारें पड़ गई है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कुछ जगहों पर जानवरों के लिए चारे का संकट भी खड़ा हो गया है। प्रदेश में बोनी के साथ ही रोपे का चलन रहा है, लेकिन कई जगहों पर इतना भी पानी नहीं बरसा कि रोपा लगाया जा सकें।
उम्मीद है कि जल्द ही सभी तहसीलों की रिपोर्ट आ जाएगी। सूखे की रिपोर्ट 12 सितम्बर को संभावित कैबिनेट की बैठक में रखी जा सकती है। फिलहाल कलक्टरों से राहत काम प्रारंभ करने को कहा गया है।
पी निहलानी, संयुक्त सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग
Published on:
04 Sept 2017 10:44 pm
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