
रायपुर. शक्ति की भक्ति में मन डूबा हुआ है। महाष्टमी (Durga Mahashtami) पर शनिवार को सुबह से हवन शुरू होगा। लेकिन, कोरोनाकाल (Corona Virus) के कारण ऐसा पहली पर हो रहा है, जब देवी मंदिरों में हवन-पूजन करने से भक्तों को दूर रखा जा रहा है। उन्हें अपने अपने घरों में ही पूजन और हवन करना होगा। देवी मंदिरों में केवल पुजारी और सेवा समिति सदस्य ही अष्टमी तिथि पर अभिषेक, महाआरती कर आहुतियां देंगे।
कन्याओं के नाम पर गौमाता को ही ग्रास खिला रहे हैं।
तीन देवियां नहीं विराजी, इसलिए सिंदूर खोला नहीं : बंगाली कालीबाड़ी में पहली बार केवल दुर्गा पूजन की रस्में की जा रही है। षष्ठी तिथि पर कलश स्थापित कर पूजन कर रहे हैं। सिटी महाकालीबाड़ी समिति के महासचिव गौतम मजूमदार ने बताया कि मां दुर्गा के साथ माता लक्ष्मी, सरस्वती और गणेश व कार्तिकेय की प्रतिमा नहीं विराजी गई।
सिंदूर खेला तब होता है तीनों देवियों को सिहागिनें पहले सिंदूर चढ़ाती है फिर उसे एक-दूसरे को लगाकर सदासुहागन की कामना करती है, परंतु इस बार कलश पूजन हो रहा है, इसमें सिंदूर खेलने की परंपरा नहीं है। अष्टमी और नवमी तिथि की युति में संधि पूजन होगा और रखिया, गन्ना और केला की बलि देने की रस्में अदा करेंगे। अन्न का भोग भी नहीं लगेगा।
Published on:
24 Oct 2020 08:37 am
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