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ED का खुलासा: शराब की अवैध बिक्री कर 2000 करोड़ रुपए का घोटाला, मास्टर माइंड के साथ शामिल थे ये अधिकारी

Raipur news: रायपुर के प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने होटल कारोबारी अनवर ढेबर को गिरफ्तार करने के बाद प्रेस रिलीज जारी किया है। शराब की अवैध बिक्री के जरिए 2000 करोड़ रुपए का घोटाला किया गया है।

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अनवर ढेबर

अनवर ढेबर

Chhattisgarh news: रायपुर के प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने होटल कारोबारी अनवर ढेबर को गिरफ्तार करने के बाद प्रेस रिलीज जारी किया है। इसमें खुलासा करते हुए बताया गया है कि किस तरह शराब की अवैध बिक्री के जरिए 2000 करोड़ रुपए का घोटाला किया गया है। बताया गया कि इस पूरे रैकेट का मास्टर माइंड अनवर ढेबर था, जिसके नेतृत्व में एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट छत्तीसगढ़ में काम कर रहा था। वह शराब के जरिए अवैध वसूली कर 1 फीसदी कमीशन अपने पास रखने के बाद बकाया राशि अपने आकाओं तक पहुंचाता था। ईडी की ओर से जारी बयान के अनुसार इस सिंडिकेट में शराब कारोबारी, राजनेता और उच्च प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे। इसके जरिए प्रदेश में बिकने वाली शराब की हर बोतल से अवैध राशि प्राप्त होती थी।

ऐसे चल रहा था अवैध कारोबार

ईडी की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि अनवर ढेबर ने राजनीतिक और प्रशासनिक दखल के चलते आबकारी विभाग में अपने करीबी अधिकारी विकास अग्रवाल और अरविन्द सिंह की नियुक्ति करवाई। वहीं (raipur news)निजी डिस्टिलर्स, एफएल-10 ए लाइसेंस धारकों, आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, जिला स्तर के आबकारी अधिकारियों, मैन-पावर सप्लायर्स, ग्लास बाटल मेकर, होलोग्राम मेकर, कैश-कलेक्शन वेंडर से लेकर कारोबार की पूरी शृंखला को नियंत्रित किया। इस पूरे रैकेट के जरिए कमीशन की वसूली की गई।

4 साल में 1200-1500 करोड़ की वसूली

जांच के दौरान पता चला कि 2019 से 2022 के बीच राज्य में शराब की करीब 30-40 फीसदी अवैध बिक्री हुई है। इसके जरिए 1200-1500 करोड़ रुपए की अवैध वसूली हुई। इस बारे में ईडी को पुख्ता जानकारी (raipur news)लगातार छापेमारी कर इनपुट एकत्रित किए गए। इसके बाद अनवर ढेबर को गिरफ्तार कर उसे पूछताछ के लिए 4 दिन की रिमांड पर लिया गया। ईडी ने रिमांड आवेदन में बताया कि किस तरह से इस पूरे खेल को चलाया जा रहा था।

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ईडी ने इस तरह अनवर ढेबर को पकड़ा

ईडी ने मार्च में उसके आवासीय परिसर सहित छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और दिल्ली में 35 स्थानों पर छापे मारे थे। जिसमें ईडी को काफी गड़बड़ियां मिलीं। इसके बाद ईडी ने पूछताछ के लिए अनवर ढेबर को सात बार समंस जारी किया। लेकिन वह हर बार चकमा देकर निकल जाता था। ऌउसने इस दौरान एक बार भी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई। ईडी के अनुसार, वह लगातार बेनामी सिम कार्ड, इंटरनेट डोंगल का उपयोग कर लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था। इस दौरान अनवर का लोकेशन ट्रेस कर 6 मई की देर रात (raipur news)उसे रायपुर के एक होटल से पकड़ा, जहां गिरफ्तारी के डर से वह छद्म नाम से होटल में रुका हुआ था। पकड़े जाने के बाद उसने भागने की कोशिश की। लेकिन, ईडी ने गिरफ्तार करने के बाद विशेष न्यायाधीश के समक्ष पेशकर पूछताछ के लिए 4 दिन की रिमांड पर लिया है।

800 शासकीय दुकानों का संचालन

राज्य में शराब की खरीदी और बिक्री पर सरकार का नियंत्रण है। वहीं 800 शराब दुकानों का संचालन भी सरकार द्वारा किया जाता है। छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड (सीएसएमसीएल) राज्य में बेचे जाने वाले सभी शराब की खरीदी केंद्रीय रूप से करता है।

प्रति बोतल 75-150 रुपए कमीशन

1. ईडी को जांच में पता चला कि सिंडिकेट को तीन अलग-अलग तरीकों से फायदा हो रहा था, जिसमें सीएसएमसीएल की सभी खरीदी पर सिंडिकेट द्वारा प्रति बोतल 75-150 रुपए कमीशन लिया गया।

2. अनवर ढेबर द्वारा बिना हिसाब-किताब के देशी शराब बनवाकर सरकारी दुकानों के माध्यम से बेचा गया। इसे राजकोष में बिना जमा कराए बिक्री की पूरी रकम सिंडिकेट द्वारा रखी गई। बोतलों में डुप्लीकेट (raipur news) होलोग्राम लगाने के लिए नगदी में नकली बोतल खरीदी गईं। वहीं राज्य के गोदामों से शराब को डिस्टिलर्स से सीधे दुकानों तक पहुंचाया गया।

3. अवैध शराब बेचने के लिए मैन पावर को प्रशिक्षित किया गया था। साथ ही पूरी बिक्री नकदी में की गई। विदेशी शराब आपूर्तिकर्ताओं से एफएल-10 ए लाइसेंस धारकों से कमीशन वसूला गया। यह लाइसेंस अनवर ढेबर के सहयोगियों को दिए गए थे।

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