‘पढ़े-लिखे लोग बन रहे विनाश का कारण’

आज हम शहर में बैठकर शेयरिंग कम्युनिटी पर मंथन कर रहे हैं जबकि आदिवासी अंचल में लोग मिलजुलकर अपने सारे काम कर रहे हैं। सही मायने में देखा जाए तो पढ़े-लिखे लोग विनाश का कारण हैं। चाहे प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुन प्रयोग हो या प्रदूषण।

रायपुर. लोगों में आपसी सहयोग की भावना खत्म हो रही है। एक वक्त था जब लोग आपस में मिलकर हर समस्या का हल खोज लिया करते थे। जन्म से लेकर मृत्यु तक के काम में सामूहिक भागीदारी हुआ करती थी।
आज हम शहर में बैठकर शेयरिंग कम्युनिटी पर मंथन कर रहे हैं जबकि आदिवासी अंचल में लोग मिलजुलकर अपने सारे काम कर रहे हैं। सही मायने में देखा जाए तो पढ़े-लिखे लोग विनाश का कारण हैं। चाहे प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुन प्रयोग हो या प्रदूषण। इन सबमें एजुकेटेड व्यक्ति ही आगे है। यह कहना था राजेश तिवारी का। बुधवार को जयस्तंभ चौक स्थित एक होटल में शेयरिंग कम्युनिटी पर परिचर्चा का आयोजन किया गया जिसमें तिवारी मुख्य अतिथि की हैसियत से शामिल हुए। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों से भी विषय विशेषज्ञ शामिल हुए। तिवारी ने कहा कि प्लास्टिक के बदले थैले की शुरुआत कोई नई बात नहीं है। एक समय एेसा था कि महिलाएं पुरानी साड़ी या कपड़ों के थैले सिलती थीं। पेपर से पुड़े बनते थे। आज जरूरत इस बात की है कि हम लोगों में जागरूकता लाएं भाईचारे की भावना को जोर दें।

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lalit sahu
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