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Elephants death case : प्रदेश में हाथी-मानव द्वंद को रोकने से लेकर उनके संरक्षण में शासन-प्रशासन करोड़ों रुपए खर्च करता है। इसके बावजूद वन विभाग हाथियों की मौत को रोकने में असफल साबित हो रहा है। 2019 से अब तक करीब 44 हाथियों की मौत हुई है, इनमें करीब 14 हाथियों की मौत बिजली के तार की चपेट में आने से हुई है। वही कई हाथियों की मौत आपसी द्वंद्व, बीमारी व झुंड से बिछड़ने के कारण भी हुई है।
2020-21 में सबसे ज्यादा 18 हाथियों की मौत : अब तक प्रदेश में 2019 और 2022 के बीच कुल 43 हाथियों की मृत्यु हुई है, शुक्रवार को हाथी की मौत के बाद ये आकंड़ा 44 हो गया है। साल के आखिरी माह में करंट से मौत शेष @ पेज 3
के बाद साल की शुरुआत में भी करंट से हाथी का मौत हुई है। राज्य में 2019-20 में 11 हाथी, 2020-21 में 18 हाथी तथा 2021-22 के दौरान 14 हाथियों की मृत्यु हुई है। इन तीन वर्षो करंट लगने से 13 जंगली हाथियों की मृत्यु हुई है। महासमुंद की घटना को मिलाकर अब तक 14 हाथियों की मौत करंट से हो गई है। इन मामलों में बिजली विभाग के तीन कर्मचारियों समेत 35 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
डूबने और दलदल में फंसकर 7 बच्चों की मौत : 2018 व 2019 में महानदी में डूबने से हाथी के दो बच्चों की मौत हो गया था, जिसमें से एक बच्चे की इलाज के दौरान मौत हुई थी।
महासमुंद वनपरिक्षेत्र में शुक्रवार रात एक दंतैल हाथी की करंट लगने से मौत हो गया है। नर हाथी की उम्र करीब 25 साल थी। 6 जनवरी की सुबह दो दंतैल हाथियों ने गरियाबंद से होते हुए महासमुंद वनपरिक्षेत्र में प्रवेश किया था। दोनों हाथी में एक एमई-1 व दूसरा एमई-5 था, जो विचरण करते हुए सिरपुर की ओर जा रहा था। रात करीब 10 बजे के आसपास दोनों हाथी कोडार जलाशय से लगे गांव के समीप वन विकास निगम के कक्ष क्रमांक 854 से होते सिरपुर की ओर आगे बढ़ रहे थे। कोडार नहर के ऊपर से 11 केवी बिजली का तार गुजरा है। वहां किसी ने जंगली सूअर के शिकार के लिए उसी तार से हुकिंग कर जीआई तार लगाया गया था। हाथी जैसे ही वहां से गुजरा तो तार के चपेट में आ गया। इस मामले में वन विभाग ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है.
वन क्षेत्र में पहले से लगातार निगरानी की जा रही है। दोबारा ऐसी घटनाएं न हों, इसलिए लोगों को जागरूकता करने के साथ-साथ दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। -सुधीर अग्रवाल, पीसीसीएफ, वाइल्ड लाइफ
करंट से हाथियों की मौत में वन विभाग व बिजली विभाग दोनों दोषी हैं। अगर बिजली विभाग सर्विस प्रोवाइडर के रूप में बिजली दे रहा है, तो कंज्यूमर और सर्विस प्रोवाइडर के बीच समझौता होता है। इधर, वन विभाग अधिनियम लेकर बैठा है। जंगल में क्या हो रहा है, नजर नहीं रख रहे हैं। इसके कारण हाथियों की मौत लगातार हो रही है। हमारे प्रदेश में ओडिशा व मध्यप्रदेश से हाथियों का आना-जाना होता है। वन विभाग कॉरिडोर तो बना नहीं रहा है। कम से कम हाथी विचरण क्षेत्र में जनजागरूकता अभियान चलाने के साथ-साथ कच्चे मकान के स्थान पर पक्के मकान बनवाए। इसके अलावा वैज्ञानिक विधि का उपयोग करके हाथियों पर नजर रखे। इन सब को लेकर मैं जल्द ही शासन को पत्र लिखने वाला हूं।
केके बिसेन, सेवानिवृत्त सीसीएफ
Published on:
09 Jan 2023 12:03 pm
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