
100 में हर दूसरा व्यक्ति ग्लूकोमा की गिरफ्त में
रायपुर.12 मार्च को विश्व ग्लूकोमा दिवस मनाया जाएगा। इसके पूर्व 8 मार्च से 14 मार्च तक विश्व ग्लूकोमा सप्ताह मनाया जा रहा है। अंधत्व निवारण समिति के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. सुभाष मिश्रा के मुताबिक आंख का दबाव बढऩे से आंख की ऑप्टिक नर्व सूख जाती है । धीरे-धीरे व्यक्ति अंधत्व की ओर चला जाता है। स्थानीय लोग इसे दृष्टिचोर, कांच बिंदु, कांचिया बिंदु या काला मोतिया भी कहते हैं।आंकड़ों के मुताबिक देश में 100 में से हर दूसरा व्यक्ति ग्लूकोमा से पीडि़त है।आंख का एक प्राकृतिक दबाव 10-20 एमएम मरकरी तक होता है। अगर, यह 20 एमएम मरकरी से ऊपर होता है उसे ग्लूकोमा कहा जाता है। यह 40 वर्ष से अधिक के लोगों में ज्यादा पाया जाता है। नवजात शिशुओं को भी प्रभावित कर सकता है। डॉ. मिश्रा ने बताया 40 वर्ष के बाद आंख की नियमित जांच नेत्र विशेषज्ञ से करवाते रहना चाहिए। यह जांच सरकारी अस्पतालों में मुफ्त है। अगर, समय पर बीमारी की पहचान कर ली जाए तो दवाईयों से इसे पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। व्यक्ति अंधा होने से बच सकता है।
Updated on:
12 Mar 2020 12:15 pm
Published on:
12 Mar 2020 12:15 pm
