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बचपन में देखा रामलीला बड़े होकर बने फोक आर्टिस्ट, अब नाटक अकादमी अवॉर्ड से हुए सम्मानित

तिवारी ने कहा कि यह मेरा ही नहीं, पूरे छत्तीसगढ़ का सम्मान है। मैं खुद को बेहद खुशकिस्मत मानता हूं कि मेरे काम को सराहा गया।

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CG News

बचपन में देखा रामलीला बड़े होकर बने फोक आर्टिस्ट, अब नाटक अकादमी अवॉर्ड से हुए सम्मानित

रायपुर. छत्तीसगढ़ की लोककला को विभिन्न माध्यम से आगे बढ़ाने वाले शहर के फोक आर्टिस्ट राकेश तिवारी संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड से नवाजे गए। बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नई दिल्ली में उन्हें सम्मानित किया। तिवारी ने कहा कि यह मेरा ही नहीं, पूरे छत्तीसगढ़ का सम्मान है। मैं खुद को बेहद खुशकिस्मत मानता हूं कि मेरे काम को सराहा गया।

मालूम हो कि तिवारी द्वारा लिखा लोक नाट्य राजा फोकलवा का देशभर में 125 बार मंचन हो चुका है। 2014 में यूनिसेफ के माध्यम से नाटक किलकारी एक सतरंगी मुस्कान किया जो स्वास्थ्य पर आधारित था। उन्होंने स्व. ठाकुर मनहरण सिंह, हगरू गोंड़ और स्व. तिहारु निषाद जैसे खाटी लोक कलाकारों के साथ लोकगीत, नाचा और रामलीला मंडली में काम किया। प्रसिद्ध लोक मंच सोन चिरइया के माध्यम से 50 से अधिक प्रस्तुति में गायन-वादन व अभिनय किया है। उन्हें चित्रोत्पला लोककला परिषद और लोग संगीत महाविद्यालय की स्थापना का श्रेय भी जाता है। इनके लिखित नाटक ठनठन पाल, राजा के सपना, लछनी टोनही हे, ओड़हर, रामप्रसाद के कथा, बरवाही के फेरा, कौवा लेगे कान, गजराज हाजिर हो, सतरंगी मुस्कान को काफी प्रसिद्धि मिली है।

बच्चों को भेजें थियेटर, होगा व्यक्तित्व का विकास

तिवारी ने कहा, जनमानस के लिए नाटक इसलिए जरूरी है, क्योंकि इसके जरिए उन तक समाज में फैली कुसंगतियों से लडऩे की ताकत मिलती है। नाटक खुद में डिसीप्लीन लाता है। सकारात्मक सोच के साथ जीने की क्षमता बढ़ाता है। बच्चों को शुरुआती तौर पर ही थियेटर सीखने के लिए भेज देना चाहिए। इससे उनका व्यक्तित्व विकास तो होगा और सामाजिक सद्भाव की भावना जागृत होगी।

ऐसा रहा सफर
तिवारी ने बताया दादाजी गांव के लोक कलाकार, फाग गीत, जसगीत और रामसत्ता भजन के गायक थे। मेरी उम्र महज चार साल की थी। मैं दादाजी के साथ रामलीला देखने जाया करते थे। गांव में जेवरा नाच पार्टी हुआ करती थी। इसमें मैने रामलीला के मंचन में हिस्सा लिया। वर्ष 1981 में रायपुर आए तो यहां चंदैनी गोंदा प्रचलित था। पुरानी बस्ती के लोक कलाकार बद्रीविशाल परमानंद के साथ बारीकियां सीखी। सोन चिरइया पार्टी का गठन कर इसके 150 से ज्यादा शोज किए। मिर्जा मसूद, राजकमल नायक और जलील रिजवी के छत्तीसगढ़ी नाटकों में सहभागिता रही। आकाशवाणी में भुइंया के गोठ का संचालन किया। दूरदर्शन में प्रसारित धारावाहिक हमर छत्तीसगढ़ के एपीसोड लिखे और निर्देशित किया। यह धारावाहिक छत्तीसगढ़ के महापुरुषों के जीवनचरित्र पर आधारित था। चित्रोत्पला लोक कला परिषद की ओर से मोर छत्तीसगढ़ के 36 एपीसोड दूरदर्शन में प्रसारित किए गए।