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प्रदेश में कोरोना से एक भी मौत नहीं हुई लेकिन पीलिया से चार मरे और 700 लोग हुए बीमार, ये वजह है जिम्मेदार

समय रहते अधिकारी चार बड़े कारणों को निराकरण समय पर कर लेते तो पीलिया भयंकर रूप से नहीं फैलता। शहर में पीलिया फैलने के क्रोनोलॉजी को जानकारों के अनुसार समझिए।

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रायपुर. शहर में पीलिया ने विकराल रूप धारण कर लिया है। मरीजों की संख्या ७०० के ऊपर पहुंच गई है, जिसमें चार लोगों की मौत भी हो गई है। जानकारों के अनुसार नगर निगम के जिम्मेदार लोग व अधिकारियों के लापरवाही के कारण पीलिया शहरभर में फैल गया है। समय रहते अधिकारी चार बड़े कारणों को निराकरण समय पर कर लेते तो पीलिया भयंकर रूप से नहीं फैलता। शहर में पीलिया फैलने के क्रोनोलॉजी को जानकारों के अनुसार समझिए। कैसे निगम के जिम्मेदारों ने समय रहते पीलिया को फैलने से रोकने में नाकाम रहे और पूरे शहर में फैल गया।

ये हैं चार कारण

फिल्टर प्लांट से गंदा पानी सप्लाई

खारुन में गिरने वाले गंदे नालों का पानी इंटेकवेल के माध्यम से आया। जहां पानी को फिल्टर करने वाला बेड मीडिया ही खराब था। नतीजा पानी बिना फिल्टर हुए ही सीधे टंकियों में गया, जहां से पानी लोगों के घरों में पहुंचा, जिसे पीकर लोग पीलिया के शिकार हुए।

पाइप लाइन का लीकेज

टंकियों से घरों में सप्लाई किए जाने वाले लाइन ही जगह-जगह लीकेज है। इस कारण से नालियों का गंदा पानी पेयजल सप्लाई में घुस रहा है और लोगों के घरों में गंदा पानी जा रहा है। निगम प्रशासन ने फिल्टर प्लांट से गंदा पानी आने की समस्या के बाद सुपर क्लोरीनेशन कर रहा है। फिर भी लीकेज की वहज से कई घरों में गंदा पानी जा रहा है और लोग बीमार हो रहे हैं।

अवैध नल कनेक्शन की भरमार

शहर में निगम के अनुसार ही करीब ५० से ६० अवैध नल कनेक्शन है। अवैध नल कनेक्शन नालियों से होकर ही ली गई। अकुशल प्लम्बर से लोगों ने अवैध नल कनेक्शन ले लिया है। इस कारण कनेक्शन के पास से ही लीकेज हो रहा है और लोगों के घरों में नालियों का गंदा पानी जा रहा है।

समय से पहले गंदे नालों को डायवर्ट नहीं किया

नगर निगम प्रशासन पहले यदि खारुन में गिरने वाले गंदे नालों को इंटेकवेल के पास गिरने से रोक देता, तो खारुन का जल स्तर जिस समय कम हुआ था, उस वक्त नाले का गंदा पानी फिल्टर प्लांट में ही नहीं पहुंचता और लोग बीमार नहीं होते।

देर से हरकत में आया निगम प्रशासन

आमापारा में पीलिया के मरीज मिलने के बाद निगम प्रशासन हरकत में आया। इसके बाद आनन-फानन में खारुन में गिरने वाले गंदे नालों को इंटेकवेल से आगे गिराने के लिए डायवर्ट किया। तब तक बहुत देर हो चुकी थी, क्योंकि लोगों फिल्टर प्लांट से सप्लाई हुए गंदे पानी को पी चुके थे। एक बार गंदा पानी पी लेने के करीब 20 से 25 दिन बाद ही पीलिया के लक्षण सामने आते हैं और शहर में यही हो रहा है।

अब ये करना चाहिए निगम को

विशेषज्ञों के मुताबि जहां-जहां पीलिया फैला है, वहां तत्काल टैंकर से ही पानी सप्लाई करना चाहिए। इसके अलावा लोगों को पीलिया होने से रोकने के लिए स्वास्थ्य शिविर लगाकर जलजनित रोगों का इलाज करना चाहिए। ताकि, गंदे पानी पी चुके लोगों को पीलिया न हो। इसके अलावा जहां-जहां से भी गंदा पानी आने की शिकायतें आ रही वहां, तत्काल पाइप लाइन का लीकेज ठीक कराना चाहिए।

पीलिया की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग के शिविर पीलिया प्रभावित इलाकों लगवाए जा रहे हैं। साथ ही वहां टैंकर से पानी सप्लाई की जा रही है। इसके अलावा नालियों के अंदर से होकर गुजरी पाइप लाइन और नल कनेक्शनों को ऊपर उठवाया जा रहा है।

- एजाज ढेबर, महापौर, नगर निगम रायपुर