
CG Herbal Gulal: होली के त्योहार पर एक दूसरे को तरह तरह के रंग लगाकर उत्साह से सभी परिवार के साथ पर्व मनाते हैं। महासमुंद जिले के ग्राम डोकरपाली बिहान से जुड़ी जय माता दी की स्व सहायता समूह की महिलाओं द्वारा हर्बल गुलाल तैयार किया जा रहा है।
हर्बल गुलाल तैयार लगाने से चेहरे पर कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे इन हर्बल गुलाल की कई विशेषताएं हैं। इसमें रंग (Holi 2024) और सुगंध के लिए फूलों का ही इस्तेमाल किया जाता है। किसी भी तरह का केमिकल नहीं मिलाया जाता है, ताकि चेहरे को कोई नुकसान न हो सके।
Scented Herbal Gulal: समूह की सदस्य चित्ररेखा दीवान ने बताया कि पिछले साल होली में 80 किलो हर्बल गुलाल महिलाओं ने बनाया था। जिससे 30 से 40 हजार रुपए की आमदनी समूह को हुई थी। होली के पर्व के समय बाजार में गुलाब की काफ़ी माँग बनी रहती है। उन्होंने कहा कि 10 रुपये, 20 और 50 रुपए के हर्बल गुलाल के पैकेट बाजार में आसानी से विक्रय हो जाता है।
गुलाल बनाने के लिए पालक, लालभाजी, हल्दी, जड़ी, बुटी व फूलों से हर्बल गुलाल बनाने का कार्य कर रही। इसके अलावा मंदिरों तथा फूलों के बाजार से निकलने वाली इस्तेमाल किए हुए फूल पत्तियों को सुखाकर प्रोसेसिंग यूनिट में पीसकर गुलाल तैयार किया जाता है। गुलाब, गेंदे, स्याही फूल के साथ चुकंदर, हल्दी, आम और अमरूद की हरी पत्तियां को भी प्रोसेस किया जाता है। इस बार भी लगभग 60 किलोग्राम गुलाल तैयार कर लिया गया है। जिसमें से आधी मात्रा बिक गई है। गुलाल अनेक रंगों में बनाए जा रहे है जिसमें हरा, गुलाबी, पीला, केसरिया गुलाल शामिल है।
Published on:
29 Feb 2024 05:11 pm
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