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गोवा के बीच और एजवेंचर्स स्पोर्ट्स का मजा लीजिए अब छत्तीसगढ़ में भी, देखिए तस्वीरें

एचपीएल के क्षेत्रीय समन्वयक अबरौल ने बताया कि एचपीएच द्वारा बनाई गई छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक कलाकृतियां, हस्तकला कलाकारों की विशेष टीम बनाकर काम किया गया।

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गोवा के बीच और एजवेंचर्स स्पोर्ट्स का मजा लीजिए अब छत्तीसगढ़ में भी, देखिए तस्वीरें

आकाश शुक्ला@रायपुर. छत्तीसगढ़ में अब लोग गोवा की तरह ही एजवेंचर्स स्पोर्ट्स का मजा उठा सकते है। जी हां, स्वदेश दर्शन योजना अंतर्गत छत्तीसगढ़ में हाल ही में 100 करोड़ की लागत से बन रहे ट्रायबल टूरिज्म सर्किट परियोजना का शुभारंभ किया गया। छत्तीसगढ़ बनने के बाद पर्यटन की दृष्टि से यह पहला और सबसे बड़ा कदम राज्य शासन द्वारा उठाया गया। इसमें छग पर्यटन मंडल द्वारा प्रदेश के 8 जिलों के 13 पर्यटन स्थलों को चुना गया है।

ट्राइबल टूरिज्म सर्किट परियोजना के अंतर्गत प्रदेश के 13 जगहों को उसकी विशिष्टता के आधार पर ट्राइबल विलेज, इको एथनिक डेस्टीनेशन, वे साइड कम्युनिटी डेवलप किया जा रहा है। इसमें तीन स्थलों को ट्राइबल विलेज, सात स्थलों में इको एथनिक डेस्टीनेशन और दो स्थलों पर वे साइड कम्युनिटी का निर्माण किया जा रहा है। ये काम दिसंबर तक पूरा हो जाएगा।

धमतरी के गंगरेल में इको एथनिक डेवलपमेंट मॉडल पर छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति को उकेरता हुए ट्राइबल सर्किट हाउस का निर्माण किया जा चुका है। यह प्रदेश में अपने तरह का पहला सर्किट हाउस है। इसमें कलाकारों ने आदिवासी संस्कृतियों को जीवंत रूप से उकेरा है। जो छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति का अद्भुत तरीके से बखान कर रहा है। इन दिनों यह प्रदेश के साथ ही देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण केंद्र बना हुआ है।

स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा महानदी के गंगरेल बांध में बने ट्राइबल विलेज सर्किट हाउस प्रदेश में पर्यटन का मुख्य केंद्र बना हुआ है। जहां इन दिनों देश-विदेश से लोग आ रहे हैं। आपको बता दें कि 14 सितंबर को इसके शुभारंभ के साथ ही ट्रायबल टूरिज्म सर्किट परियोजना शुभारंभ केंद्रीय मंत्री किया गया। गंगरेल में ट्राइबल विलेज सर्किट हाउस का निर्माण करने वाली कंपनी के हिंदुस्तान प्रीफैब लिमिटेड के क्षेत्रीय समन्वयक कपिल अबरौल ने बताया कि ट्राइबल विलेज में विशेष प्रकार की लकड़ी का इस्तेमाल किया गया। है, जो पूरी तरह से इको फ्रेंडली है। इसके अलावा पूरे रिसॉर्ट क्षेत्र में 10 केडब्ल्यू का सोलर पॉवर सब स्टेशन व हाई मास्टर सोलर लाइट के पोल लगाया गया है। पूरे प्रोजेक्ट का कार्य पर्यावरण को ध्यान रखकर किया गया है।

एचपीएल के क्षेत्रीय समन्वयक अबरौल ने बताया कि एचपीएच द्वारा बनाई गई छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक कलाकृतियां, हस्तकला कलाकारों की विशेष टीम बनाकर काम किया गया। प्रमुख रूप से आदिवासी संस्कृतियों को उकेरा। इस ट्राइबल विलेज की कलाकृतियां स्थानीय कलाकारों ने बनाया है, जो छत्तीसगढ़ की गौरवशाली संस्कृति को बता रहा है। इसके अलावा यहां विश्व स्तरीय वाटर स्पोट्र्स भी लोगों को काफी आकर्षित कर रहा है।

जशपुर, महेशपुर (अंबिकापुर), सरोदादादर (चिल्फी घाटी), नाथियानवागांव (कांकेर), कोंडागांव, जगदलपुर, चित्रकोट, तीरथगढ़, मैनपाट, कमलेश्वरपुर, गंगरेल (धमतरी), कुरदर (बिलासपुर) स्थानों पर ट्रायबल टूरिज्म सर्किट परियोजना के तहत कार्य चल रहे है। जो आगामी दिसंबर महीने तक पूर्ण हो जाएंगे।

छत्तीसगढ़ में जनजातीय सर्किट परियोजना के तहत स्वीकृत स्थानों में ट्राइबल सर्किट क्राफ्ट हाट्स, खुले एम्फीथिएटर, जनजातीय व्याख्या केंद्र, कार्यशाला केंद्र, दृष्टिकोण, प्रकृति के निशान, सौर रोशनी आदि शामिल हैं। इस तरह से कार्य योजना के अंतर्गत पर्यटन केेंद्रों को एक नई पहचान दी जा रही है। प्रदेश के अलावा देश व विदेशी सैलानियों को ये स्थान काफी लुभाने वाला है।

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि स्वदेश दर्शन योजना अंतर्गत छत्तीसगढ़ में ट्रायबल टूरिज्म सर्किट परियोजना का कार्य प्रगति पर है। जो जल्द ही पूरा हो जाएगा। छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला, संस्कृति ने पूरे देश में एक अलग पहचान बनाया है। इस योजना से विश्व स्तर पर छत्तीसगढ़ में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

किसी प्रोजेक्ट में आएगी कितनी लागत

















ट्राइबल विलेज
10 से 11 करोड़
इको एथनिक डेवलपमेंट9 से 10 करोड़

वे-साइड एम्युनिटी
55 - 60 लाख