
स्वच्छता सर्वे में गार्बेज फ्री सिटी का लक्ष्य, शहर थ्री स्टार रेटिंग के योग्य
रायपुर. स्वच्छता सर्वे में इस बार का लक्ष्य गार्बेज फ्री सिटी रखा गया है। हर कैटेगरी में हर स्टेज पर एक से लेकर सात स्टार तक दिए जाने का प्रावधान है। जिस शहर को सभी कैटेगरी 7 स्टार मिलेंगे, उसे गार्बेज फ्री सिटी का तमगा मिलेगा। इधर, नगर निगम ने स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 के लिए अपने आपको को थ्री स्टार रेंटिंग की कै टेगरी में रखा है।
क्योंकि नगर निगम ने राजधानी रायपुर में अभी सेवन स्टार कैटेगरी स्तर के लिए न तो निगम के पास संसाधन हैं और न ही साफ-सफाई को उस स्तर पर पहुंचा पाया है। निगम ने थ्री स्टार के लिए आवेदन भी किया है। इसकी रैंकिंग के लिए अभी तक टीम नहीं केंद्र से नहीं आई है।
जानकारों के अनुसार स्वच्छता रैंकिंग 2018 में 139वें पायदान पर रहने वाले रायपुर शहर की वर्तमान सफाई व्यवस्था का जायजा लिया जाए तो नए पैरामीटर्स यानी थ्री स्टार की कसौटी पर खरा उतरने की चुनौती आसान नजर नहीं आती है। हकीकत तो यह है कि नई गाइड लाइन के अनुसार यदि स्वच्छता सर्वे होगा तो रायपुर को सभी कैटेगरी में थ्री स्टार के लिए तरसना पड़ सकता है।
क्या कहती है नई गाइड लाइन
डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन रेटिंग: 60 प्रतिशत पर एक स्टार, 80 प्रतिशत पर दो स्टार और 100 प्रतिशत पर तीन स्टार । निगम का दावा है कि शहर में अभी 80 फीसदी डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन हो रहा है। लेकिन कचरा नियमित नहीं है। कॉलोनी में कचरा पड़ा रहता है। यहंी स्थिति संतोषी नगर, टिकरापारा, मठपुरैना, चौरसिया कॉलोनी, खम्हारडीह, खमतराई, भनपुरी, मोवा, दलदल सिवनी, सहित अन्य क्षेत्रों में है। इस हिसाब से वन स्टार मिलने की उम्मीद काफी कम है।
सेग्रीगेशन एट सोर्स रेटिंग: 25 प्रतिशत पर एक, 50 प्रतिशत पर दो, 80 प्रतिशत पर तीन स्टार और 100 प्रतश्ता पर चार स्टार। निगम का दावा है कि डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के साथ ही सूखा और गीला कचरा अलग-अलग किया जा रहा है। कचरा कलेक्शन गाडिय़ों में सूखे और गीले कचरे के लिए दो कलेक्शन है। लेकिन दोनों कचरे मिक्स हो रहे हैं। इस तरह देखा जाए तो एक स्टार भी मिलना मुश्किल लग रहा है।
सार्वजनिक स्थानों पर हरे-नीले कूड़ेदान: 50-100 मीटर के दायरे में हरे और नीले कूड़ेदान 100 प्रतिशत उपलब्ध होने पर ही 7 स्टार मिलेंगे। निगम के अनुसार 80 फीसदी जगहों पर कूड़ेदान रखे गए हैं। पर हकीकत तो यह है कि कूड़ेदान लगाए हैं, लेकिन कुछ ही इलाके में है। वह भी टूटे-फूटे हुए हैं। कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं है जहां सभी कूड़ेदान बेहतर स्थिति में हो।
कचरा और अतिक्रमण की मुसीबत
शहर का कोई भी इलाका ऐसा नहीं है जहां कचरा नजर न आ रहा हो। नगर निगम चाह भी ले तब भी शहर के नाले-नालियों की सफाई नहीं हो सकती, क्योंकि शहर के बीच हिस्से से होकर गुजरे 75 बड़ नालों पर अतिक्रमण है। अंडर ग्राउंड सीवेज सिस्टम नहीं है। सरकारी दफ्तरों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है तो निजी कार्यालयों और काम्प्लेक्स में कचरे के साथ खुले में सीवेज बहता हुआ दिख जाएगा। घरों से ही कचरा सेग्रीगेशन पर कोई काम नहीं किया जा रहा है।
नगर निगम रायपुर के स्वच्छता मॉनिटर हरेंद्र साहू ने बताया कि स्टार रेटिंग के फ्रेम वर्क अनुरूप हमने थ्री स्टार रेटिंग के लिए आवेदन किया है। पूरी उम्मीद है कि थ्री स्टार रेटिंग इस बार मिलेगी। इसके अलावा पिछले साल स्वच्छता रैंकिंग में जो भी खामियां रही उसे दुरुस्त कर स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 के लिए जोरों पर तैयारी की जा रही है।
Published on:
16 Dec 2018 11:09 am
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