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रायपुर. छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित 10 जिलों में तैनात केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) जवानों का जोखिम भत्ता बढ़ा दिया गया है। इन जिलों में सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, बस्तर, कोंडागांव, कांकेर, राजनांदगांव, सरगुजा और बलरामपुर शामिल हैं।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के नए आदेश से इन जिलों में तैनात को 17 हजार 700 से 25 हजार रुपए तक का जोखिम भत्ता मिलेगा। इससे नक्सल विरोधी मोर्चे पर तैनात करीब 27 हजार अधिकारियों-जवानों को फायदा होगा।
माओवाद प्रभावित छत्तीसगढ़ में इस समय केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, सशस्त्र सीमा बल और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की दर्जनों बटालियन तैनात है। उनमें से सीआरपीएफ अग्रिम मोर्चे पर राज्य पुलिस बलों के साथ नक्सल विरोधी अभियानों का संचालन कर रही है।
माओवाद के खिलाफ लड़ाई में सीआरपीएफ को ही सबसे अधिक नुकसान भी पहुंचा है। 14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती आतंकी हमले के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केंद्रीय बलों की जरूरतों और मांगों की समीक्षा करने के बाद यह निर्णय लिया है।
प्रदेश में माओवाद प्रभावित 14 जिले
प्रदेश में फिलहाल 14 जिलों को माओवाद प्रभावित की सूची में रखा गया है। सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, बस्तर, कोंडागांव, कांकेर, राजनांदगांव, सरगुजा और बलरामपुर के अलावा धमतरी, गरियाबंद, कवर्धा व महासमुंद जिलों में भी माओवादी गतिविधियां हैं। हालांकि शुरुआती 10 जिलों को ही बेहद जोखिम का क्षेत्र माना गया है।
Published on:
25 Feb 2019 12:57 pm
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