
रायपुर. ब्रह्मपुरी स्थित दत्तात्रेय मंदिर में 10 दिवसीय महोत्सव मना रहा है। यह उत्सव है भगवान दत्तात्रेय के जन्म का। इसके तहत 9 दिन तक कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए गए। शुक्रवार को गोपाल काला उत्सव के साथ इसका समापन हो जाएगा। यह भी अपने आप में अनोखा उत्सव है जो एकता का संदेश देता है।
कैसे? जानिए...
दरअसल, गोपाल काला उत्सव के तहत मंदिर में 3 घंटे तक श्रीकृष्ण के भजन गाए जाते हैं। इसमें 3 से 4 भजन मंडलियों की तकरीबन 100 महिलाएं जुटती हैं। खास बात ये है कि ये महिलाएं अपने घर से लाई, चिवड़ा, मक्खन, श्रीखंड जैसी 30 अलग-अलग तरह की खाद्य सामग्रियां लेकर मंदिर आएंगी। इन्हें 2 बड़े गंज में मिलाया जाएगा। इसके बाद मंदिर में भगवान के दर्शन करने आए सभी श्रद्धालुओं को इसे ही प्रसाद के रूप में बांटा जाएगा। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष हरिवल्लभ अग्रवाल ने बताया कि अमीर-गरीब, हर वर्ग की महिलाएं अपने घर से प्रसाद के लिए सामग्री लेकर आती हैं। फिर इसे सभी में समान रूप से बांट दिया जाता है। इस तरह यह परंपरा समाज में समानता कायम करती है। इसे शुरू करने का उद्देश्य भी यही था।
9वें दिन ब्राह्मणों को भोज कराया फिर 5 हजार भक्तों में बांटा प्रसाद
गुरुवार को जयंती महोत्सव के 9वें दिन मंदिर में ब्राह्मण भोज का आयोजन किया गया। इस अवसर पर शहर के विभिन्न मंदिरों के पंडितों को भोजन कराया गया। इसके बाद महाभंडारा हुआ। मंदिर ट्रस्ट के दावे के मुताबिक दोपहर से देर शाम तक इसमें 5 हजार से अधिक भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
मिली जानकारी के मुताबिक शुक्रवार को गोपाल काला उत्सव पर बंटने वाले प्रसाद का खासा महत्व है। इसके लिए दूर-दराज के गांवों से लोग मंदिर पहुंचेंगे। इसे देखते हुए व्यापक तैयारियां की जा रहीं हैं। गुरुवार को कार्यक्रम के दौरान आचार्य पं. सुबोध पांडेय, आचार्य पं. राजेश शर्मा, मुख्य पुजारी माधो प्रसाद पाठक, हनुमान मंदिर के महंत राजेश शर्मा, कन्हैया अग्रवाल, धर्मेश नामदेव, चेतन दंडवते, श्रीकांत दामले, महेशराम साहू, विनायक राव कांकडे, दिनेश फनसलकर, अनुजा दुबे, हेमा ताई बरवे आदि मौजूद रहे।
Published on:
08 Dec 2022 09:21 pm
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