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#HallaBol: तारीख पर तारीख, तारीख पर तारीख आखिर संविलियन कब

शिक्षाकर्मियों के लिए हाई पावर कमेटी बनाई गई इसी विषय पर हुए पत्रिका के सोशल मीडिया पर लाइव कार्यक्रम में आए पॅनालिस्टों ने अपनी बात रखी

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हल्लाबोल@रायपुर: पिछले 18 सालों में कई बार शिक्षाकर्मियों के लिए हाई पावर कमेटी बनाई गई और उन कमेटियों ने कई टीमें गठित की। शिक्षाकर्मियों के संविलियन की बात पिछले चुनाव में बीजेपी ने अपने घोषणां पत्र में भी कही थी। लेकिन शिक्षाकर्मियों को सिर्फ तारीख पर तारीख ही दी जाती रही है। इसी विषय पर हुए पत्रिका के सोशल मीडिया पर लाइव कार्यक्रम में आए पॅनालिस्टों ने अपनी बात रखी।

शिक्षाकर्मी संघ के अध्यक्ष विरेंद्र दुवे ने कहा कि हमारी स्थिती आज से 18 साल पहले थी वैसी ही बनी हुई है। सरकार इतने वर्षों में यही तय नही कर पा रही कि संविलियन किया जाए कि नही। मुख्य सचिव के साथ बैठक का भी कोई रिजल्ट नही निकला। एम पी सरकार ने ढाई लाख शिक्षाकर्मियों का संविलियन कर दिया लेकिन हमारी सरकार डेढ़ लाख कर्मियों का संविलियन करने में संकोच कर रही। अभी हाल ही में जिस दिन प्रधानमंत्री छत्तीसगढ़ के दौरे पर यहां आएंगे उस दिन उनके सामने ही प्रदेश भर के शिक्षाकर्मी मुंडन आंदोलन करेंगे।

प्रदेश काग्रेस के प्रवक्ता आनंद मिश्रा ने कहा कि शिक्षाकर्मियों की एकता में फूट के कारण सरकार इनका फायदा उठा रही है। इनके कुछ नेता अब सार्वजनिक हित नही बल्की स्वहित चाहते हैं वो लोग राजनेता बनने की चाहत में प्रदेश भर के शिक्षाकर्मियों के हितों से खिलवाड़ कर रहे। इनकी हड़ताल समाप्त कराने के पहले ही मुख्यमंत्री ने कह दिया था कि संविलियन संभव नही है। फिर एक रात में ऐसा क्या हुआ जेल में कि रातोरात हड़ताल समाप्ती की घोषणां की गई। और अभी फिर से चुनाव के पहले हड़ताल पर जाने की बात कर रहे हैं।

शिक्षाकर्मी डा. सांत्वना ठाकुर ने कहा कि हमारी मागें एक दो दिन पहले कि नहीं बल्की 18 वर्षों से ऐसे ही लटकाई जा रही है। सरकार का हमारे प्रति ये ढीला रवैया उसे महगा भी पड़ सकता है। चुनाव से पहले यदि हमारा संविलियन नही किया गया तो प्रदेश भर के शिक्षाकर्मी सरकार बदल देगें। फिर विपक्ष में बैठ कर सोचते रहेंगे कि निर्णय लेने में देरी नही करते तो शायद सत्ता में होते।

शिक्षाकर्मी दीपिका झा ने कहा कि आज के डिजिटल जमाने में सरकार को दूसरे राज्यों से डिटेल लेने के लिए टीम बनानी पड़ रही। लेकिन हड़ताल के बाद हमारी अटेंडेंस के लिए पंचिंग मशीन लगाने में कोई देरी नही हुई न ही कोई टीम गठित हुई। हमारे मैटर को जान बूझ कर लटका रही सरकार। लेकिन हम अभी भी इस सरकार को आखिरी मौका देना चाहते हैं कि नये सत्र के पहले हमारी मांगे पूरी करदे।

पैरामेडिकल के अध्यक्ष नरेश साहू ने कहा कि जब शराब बेचने की बात थी तब सरकार रातों-रात सरे काम कर लेती है। लेकिन कर्मचारियों के लिए कमेटियों पर कमेटियां बनाई जाती है। समर वेकेशन में अपने चहेते कर्मचारियों को टूर पर भेज रही सरकार और बहाना राजस्थान सरकार की शिक्षाकर्मियों की नीति जानने का बता रही। शराब बंदी के दौरान भी देश भर के राज्यों में टीम भेजी गई थी लेकिन उसकी रिर्पोट का अभी तक कोई अता-पता नही है।

अनुदान प्राप्त शिक्षाकर्मी स्वाती सिंह ठाकुर ने कहा कि सरकार हमें उलझाकर रखना चाहती है। इसी लिए हर बार नए-नए बहाने बना रही है। लेकिन हम भी चुनाव के पहले याद दिलाएंगे कि आपने अपने चुनावी घोषणां पत्र में जो लिखा था उसे पूरा कीजिए।

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