छत्तीसगढ़ी में कड़वा मतलब 'करू' होता है और पके हुए चावल को 'भात' कहा जाता है। इस व्रत पूजा से एक दिन पहले बुधवार को शाम समय का भोजन करेला की सब्जी भात का भोग लगाएंगी और खीरा खाकर सोएंगी, ताकि अन्न का डकार न आए। इसके बाद कुछ भी नहीं खाती हैं। इस दिन छत्तीसगढ़ के हर घर में करेले की सब्जी खासतौर पर बनाई जाती है।