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रायपुर. सड़कों पर आसानी से घुमंतू बच्चे (चिल्ड्रन इन स्ट्रीट सिचुएशन) भिक्षावृत्ति करते या कचरा एकत्र करते नजर आते हैं। एेसे बच्चों की पढ़ाई और शिक्षा के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने एकीकृत बाल संरक्षण योजना (मिशन वात्सल्य) शुरू करने जा रही है। इसके तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले दो बच्चों को हर माह आर्थिक सहायता राशि दी जाएगी। यह राशि महानगरों के लिए 36 हजार, अन्य नगरों के लिए 33 हजार और ग्रामीण क्षेत्रों लिए 24 हजार रुपए प्रति बच्चे की मान से सालाना दी जाएगी। यदि आप को सड़कों पर एेसे बच्चे नजर आते हैं, तो उनकी जानकारी महिला एवं बाल विकास विभाग को दे सकते हैं। हो सकता है कि आपके एक प्रयास से बच्चे के जीवन में कोई बड़ा बदलाव आ जाए।
दो तरह से होगा चिन्हांकन
- एेसे बच्चे जिनके माता-पिता नहीं है, माता-पिता जेल में सजा काट रहे है, माता-पिता गंभीर बीमारी से ग्रसित है या फिर जिस बच्चे को परिवार से बेघर कर दिया गया है। इन बच्चों की खोज कर सरकार उन्हें बाल गृह में रखकर शिक्षा व अन्य व्यवस्था करेगी।
- एेसे बच्चे जो अपना जीवन यापन करने के लिए रोजगार करने पर मजबूर हो रहे हैं, उनके परिवार को आर्थिक सहायता दी जाएगी, ताकि बच्चों को काम करने की जरूरत नहीं हो और वे पढ़ाई कर सकें। एेसे बच्चों को स्कूलों में प्रवेश भी कराया जाएगा।
4 से अधिक बच्चे वाले परिवार को सहायता नहीं
योजना के तहत पात्र परिवार के अधिकतम दो बच्चों को प्रतिमाह प्रति बालक के हिसाब से 2 हजार रुपए दिए जाएंगे। दो से अधिक बच्चे होने पर बालिकाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। चार से अधिक बच्चों वाले परिवार को यह सहायता नहीं दी जाएगी। यह सहायता अधिकतम 3 वर्ष अथवा 18 वर्ष की आयु पूरी होने तक दी जाएगी।
हर जिले में बनेगी पांच सदस्यीय समिति
हर जिले में पांच सदस्यीय समिति गठित की जाएगी। इस समिति का अध्यक्ष महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी को बनाया जाएगा। सचिव जिला बाल संरक्षण अधिकारी होंगे। इसमें किशोर न्याय बोर्ड के सामाजिक सदस्य और समाजसेवी संस्थान के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा।
Published on:
05 Feb 2022 11:48 am
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