1 फ़रवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

नौ चिटफंड कंपनियों के निदेशकों के खिलाफ जल्द होगा केस दर्ज, हाईकोर्ट ने दिए निर्देश

चिटफंड अभिकर्ताओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए शासन को सांई प्रसाद, सांई प्रकाश, एडीबी, एनपीसीएल समेत 9 कंपनियों के निदेशकों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने के निर्देेश दिए

2 min read
Google source verification
Bilaspur hogh court

नौ चिटफंड कंपनियों के निदेशकों के खिलाफ जल्द होगा केस दर्ज, हाईकोर्ट ने दिए निर्देश

बिलासपुर. हाईकोर्ट की एकल पीठ ने बुधवार को प्रदेश भर के परेशानहाल चिटफंड अभिकर्ताओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए शासन को सांई प्रसाद, सांई प्रकाश, एडीबी, एनपीसीएल समेत 9 कंपनियों के निदेशकों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने के निर्देेश दिए। कोर्ट ने मामले की विवेचना और उचित कार्रवाई करने के भी निर्देश देते हुए याचिका निराकृत कर दी। याचिकाकर्ता जीवन लाल, संतोष कुमार, सुंदर लाल, नेतराम समेत करीब 18 हजार अभिकर्ताओं ने हाईकोर्ट में शपथ पत्र देकर प्रदेश की चिटफंड कंपनियों के संचालकों के खिलाफ करोड़ों रुपए का गबन करने का आरोप लगाते हुए मामले की जांच किए जाने की मांग की है।

पूर्व सीएम की पत्नी, दामाद, मंत्रियों और कई आला अफसरों पर कंपनियों को प्रमोट करने का आरोप
याचिकाकर्ता एवं अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर के माध्यम से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि चिटफंड कंपनियों को प्रमोट करने के लिए तत्कालीन भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की पत्नी वीणा सिंह, दामाद डॉ. पुनीत गुप्ता, गृह मंत्री रामसेवक पैकरा समेत मंत्रिमंडल में शामिल सभी मंत्रियों एवं प्रशासनिक सेवा के कई आला अधिकारियों ने कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर लोगों को इन कंपनियों में निवेश करने के लिए प्रेरित किया।

याचिका में यह भी कहा गया कि चिटफंड कंपनी ने न सिर्फ निवेशकों बल्कि एजेंटों को भी धोखा दिया और उनके लाखों रुपए हड़प लिए। इधर पुलिस कंपनियों के निदेशकों, संचालकों, राजनेताओं और अधिकारियों को छोड़ एजेंटों को परेशान कर रही है। कई एजेंटों ने तो परेशान होकर आत्महत्या भी कर लिया। याचिका में दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए डूबे रुपए वापस दिलाए जाने की मांग की गई है।

20 लाख लोगों की 50 हजार करोड़ की गाढ़ी कमाई डूब गई
याचिका में कहा गया है कि लोगों ने पोस्ट आफिस और बैंकों में जमा किए अपने सुरक्षित निवेश को तोडकऱ इन कंपनियों में रुपए लगाए। अगर प्रदेश का ही आंकड़ा लें तो करीब 20 लाख से अधिक लोगों ने अपने खून-पसीने की गाढ़ी कमाई इन कंपनियों में लगा दी। बाद में इन कंपनियों ने अपना रंग दिखाया और 50 हजार करोड़ से अधिक की राशि लेकर चंपत हो गए।

अगर देशव्यापी आंकड़ा देखें तो करीब 10 करोड़ अभिकर्ताओं से 2 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि डूब गई। मजे की बात है कि आज तक इन कंपनियों का कोई बाल बांका नहीं हुआ। कई चिटफंड कंपनियां तो नाम बदलकर अभी भी इस खेल में लगी हैं। इन कंपनियों में शामिल निदेशकों का राजनीतिक रसूख इतना जबर्दस्त है कि कई राज्य सरकारें इन्हें बचाने में लगी हैं।

Story Loader