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गुड़ खरीदी की टेंडर प्रक्रिया पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, अगली सुनवाई 29 जून को

याचिका के माध्यम से यह आरोप लगाया गया था कि इसमें उन निविदाकारों की निविदा को मान्य किया गया जो अपात्र थे और जिनके रेट भी अधिक थे। इसके अलावा याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता (अंबे इंडस्ट्री) के टेंडर को जानबूझकर निरस्त कर दिया गया है।

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बिलासपुर. रायपुर की अंबे इंडस्ट्री के तरफ से दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने बस्तर संभाग में गुड खरीदी सबंधित टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगाई दी हैं। मामले की अगली सुनवाई 29 जून को होगी। हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार की उपक्रम छत्तीसगढ़ सिविल कॉर्पोरेशन से जवाब मांगा हैं। पूरे मामले की सुनवाई कार्यवाहक चीफ जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायाधीश पीपी साहू की युगलपीठ में हुई।

रायपुर की अंबे इंडस्ट्री की तरफ से अधिवक्ता सतीश गुप्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी जिसमें बताया गया था कि सरकार की उपक्रम छत्तीसगढ़ सिविल कॉर्पोरेशन द्वारा बस्तर संभाग में गुड़ खरीदी के लिए 10 अप्रैल 2021 को टेंडर बुलाया गया था। याचिका के माध्यम से यह आरोप लगाया गया था कि इसमें उन निविदाकारों की निविदा को मान्य किया गया जो अपात्र थे और जिनके रेट भी अधिक थे। इसके अलावा याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता (अंबे इंडस्ट्री) के टेंडर को जानबूझकर निरस्त कर दिया गया है।

याचिका में बताया गया कि जिस टेंडर को स्वीकृत कर एल-1 दिया गया वह 4790 रुपए प्रति क्विंटल है, जो कि पिछले टेंडर से लगभग 600 रुपए प्रति क्विंटल ज्यादा है जबकि गुड़ का बाजार भाव पिछले निविदा से 700 रुपए कम है और अम्बे इंडस्ट्री ने 4100 प्रति क्विंटल में गुड़ देने हेतु अपना ऑफर रेट भी दिया है। इस प्रकार सभी सप्लाई के खर्च को जोड़कर 1 हजार रुपए प्रति क्विंटल ज्यादा है।

इससे टेंडर के 6800 प्रति मीट्रिक टन की सप्लाई में कॉर्पोरेशन को राज्य की जनता का लगभग 17 करोड़ रुपए का नुकसान करना पड़ेगा। इस तरह से आम जनता व राज्य शासन की राशि का दुरुपयोग होने की जानकारी याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट को दी गई थी। इसके बाद मामले में कार्यवाहक चीफ जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायाधीश पीपी साहू की युगलपीठ ने सुनवाई करते हुए पूरी प्रक्रिया पर आगामी सुनवाई तक रोक लगा दिया है। मामले की अगली सुनवाई 29 जून को की जाएगी।

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