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अमरीका की स्कॉलरशिप छोड़ थियेटर को चुना, आज 200 से ज्यादा फिल्में कर चुकी हैं हिमानी शिवपुरी

लोग हंसते थे कि डॉक्टरी छोड़ ये कैसा शौक पाल लिया, छोटे परदे से सिल्वर स्क्रीन चमका सितारा

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अमरीका की स्कॉलरशिप छोड़ थियेटर को चुना, आज 200 से ज्यादा फिल्में कर चुकी हैं हिमानी शिवपुरी

संस्कृति विभाग परिसर स्थित गढ़ कलेवा में अभिनेत्री ने भोजन किया।

ताबीर हुसैन @ रायपुर.मेरा सपना था डॉक्टर बनने का। थियेटर में मुझे मजा आता था। मेरा सलेक्शन एमएस ऑर्गेनिक केमेस्ट्री के लिए अमरीका में हो गया था। मैं वीजा अप्लाई करने दिल्ली गई थी। मुझे किसी ने (नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा) एनएसडी के बारे में बताया था। मैंने वहां भी अप्लाई कर दिया। संयोग से मेरा सलेक्शन हो गया। यही मेरी लाइफ का टर्निंग प्वाइंट रहा। मैंने टीवी सीरियल किए, 200 से ज्यादा फिल्में की लेकिन थियेटर से आज भी जुड़ाव है जो आखिरी तक रहेगा। ये कहना है हम आपके हैं कौन की राजिया यानी चची जान, हीरो नंबर 1 की शन्नू, कुछ-कुछ होता है की रिफत बी, परदेश की कुलवंती और दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे की कम्मो कौर का। ये वे फिल्में हैं जो बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुईं थीं। बीटीआई प्रोग्राम में चल रहे किताब मेले में अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी ने शिरकत की। इससे पहले संस्कृति विभाग परिसर स्थित गढ़कलेवा में उन्होंने पत्रिका से विशेष बातचीत की। इस दौरान रंगकर्मी दंपती सुभाष-रचना मिश्रा भी मौजूद थे। हिमानी ने गढ़कलेवा में भोजन किया।

भट्टजी की बेटी का दिमाग खराब हो गया

स्कॉलरशिप छोडऩे और ड्रामा स्कूल ज्वाइन करने की खबर जब शहर को हुई तो लोग कहने लगे भट्टजी की बेटी का दिमाग खराब हो गया है। पापा ने मुझे समझाया लेकिन मेरी इच्छा का सम्मान करते हुए थियेटर के लिए इजाजत दी। टीवी से पहले ही मुझे 'अब आएगा मजा, फिल्म मिल गई थी लेकिन ज्यादा नहीं चल पाई। उस वक्त टीवी सीरियल हम लोग के लिए छुटकी का रोल ऑफर हुआ लेकिन उसके लिए मुझे ड्रामा छोडऩा पड़ता। इसलिए मैंने मना कर दिया।

ऐसे मिली हम आपके हैं कौन

सूरज बडज़ात्या ने मेरा एक नाटक देखा था। उन्होंने एक बार मुझे ऑफिस बुलाया और बताया कि हम आपके हैं कौन की स्क्रिप्ट लिख दी थी लेकिन उस नाटक में आपका हज्जो का रोल देखकर हमने इस मूवी में फिर से गढ़ा। मैंने फिल्म की। इसके बाद जी का सीरियल हसरतें कर रहीं थीं तब आदित्य चोपड़ा शूटिंग स्पॉट पर ही आकर दिलवाले दुल्हनिया की स्क्रीप्ट सुनाई। इंटरवल तक पहुंचने से पहले ही मैंने हां कह दिया था। इस मूवी के क्लाइमेक्स मैं नजर नहीं आई क्योंकि उसी दौरान मेरे हसबैंड का निधन हो गया था।

हबीब तनवीर के साथ किया है काम

मैंने मशहूर रंगकर्मी हबीब तनवीर के नाटक में भी उनके साथ काम किया है। रायपुर के लिए बड़ी उपलब्धि है कि यहां ऐसे महान रंगकर्मी हुए। इन दिनों मैं बुंदेलीभाषा का सीरियल कर रही हूं।