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आखिर कैसे बनाते है पुलिस और स्कूली बच्चों के कपड़े

राज्योत्सव में लगे हथकरघा के स्टॉल पर जाकर आप जान पाएंगे कैसे बनते है पुलिस और स्कूली बच्चो के लिए कपड़े

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रायपुर@सुमित यादव: कपड़ों की अलग-अलग डिजाइन को देखकर हर कोई आकर्षित होता है।कपड़ों को किस तरह से तैयार किया जाता है और कई रंगों में आकर्षक बनाया जाता है इसे अधिकतर लोग नहीं जान पाते। अगर इसे देखना है तो राज्योत्सव स्थल पर लगाए गए हथकरघा के स्टॉल में जा सकते हैं। यहां देखने के लिए सुबह से ही लोगों की भीड़ जमा होने लगती है। स्टॉल में लगे हथकरघा मशीन से कपड़े तैयार होते हुए देखने के लिए दर्शक खुद को रोक नहीं पाते और मोबाइल में इन दृश्यों को कैद करते नजर आते हैं।

पानीपत में होती है कपड़ों की रंगाई
चम्पेश्वर बुनकर समिति मंदलौर से आए हेमलाल देवांगन बताते हैं कि राज्योत्सव में पहली बार बुनकर समिति का स्टॉल लगाया गया है। सुबह से लेकर शाम तक दर्शक यहां आते रहते हैं। वे बताते हैं कि बुनकर संघ के साथ वे पिछले दस वर्षों से हथकरघा से कपड़े तैयार कर रहे हैं। इसके लिए सबको शासन द्वारा धागा मिलता है, जिससे स्कूली बच्चों के लिए स्कूली ड्रेस तैयार की जाती है। कपड़े की रंगाई पानीपत में की जाती है। देवांगन बताते हैं कि जब बुनकर को शासन की तरफ से रोजगार मिला, तब जाकरस्कूल के बच्चों को ड्रेस मिली। इससे पहले छत्तीसगढ़ में स्कूली बच्चों का ड्रेसकोड नहीं था।

बेटी का मिला साथ
उम्र के साथ काम करने की क्षमता कम होने लगती है, लेकिन जब उस समय किसी का साथ मिलता है तो हौसला दोगुना हो जाता है। एेसे में हेमलाल को उनकी बेटी गीता देवांगन का साथ मिला तो राह और भी आसान हो गई। देवांगन बताते हैं कि पहले मेरे पास एक ही हथकरघा था। आज बेटी के लिए भी एक मशीन शासन द्वारा दी गई है। स्कूल ड्रेस बनाने के लिए ऑर्डर आते हैं तो हम बाप बेटी मिलकर तैयार कर लेते हैं।

कलाकार इन मशीनो से करते हैं काम
स्टॉल में हथकरघा के साथ बटन मशीन, काज मशीन, इंटरलॉक मशीन, सिलाई मशीन रखी गई हैं। यहां कटर मशीन भी मौजूद है, जिससे तैयार कपड़े को काटने का काम किया जाता है।

इन कपड़ों के लिए मिलते हैं ऑर्डर
हेमलाल को ट्रैफिक पुलिस यूनिफार्म, सरकारी स्कूली बच्चों के ड्रेस आदि को तैयार करने के ऑर्डर मिलते हैं। जिसमें एक मीटर में 22 से 24 रुपए का अनुदान मिलता।