13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सीनियर IPS अफसर पवन देव को हाईकोर्ट से तगड़ा झटका, कैट के आदेश पर लगाई रोक

छत्तीसगढ़ के सीनियर आईपीएस अफसर पवन देव को बिलासपुर हाईकोर्ट से तगड़ा झटका लगा है।

2 min read
Google source verification
Controversial IPS Pawan Dev

HS stays CAT order for IPS Pawan Dev in sexual harassment case

रायपुर. छत्तीसगढ़ के सीनियर आईपीएस अफसर पवन देव को बिलासपुर हाईकोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण द्वारा तत्कालीन आईजी पवन देव के पक्ष में दिए गए आदेश पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने 11 जुलाई के पहले गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक से पवन देव के विरुद्ध की गई कार्रवाई की जानकारी देने को भी कहा है। सीनियर आईपीएस अफसर पवन देव के खिलाफ महिला कांस्टेबल प्रताड़ना और फोन पर अश्लील बातें करने का आरोप लगाया था।

इससे पहले सीजे टीबी राधाकृष्णन की युगलपीठ ने महिला कांस्टेबल की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए गृह सचिव और डीजीपी को नोटिस जारी कर 3 जुलाई तक जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद कोर्ट ने शासन को नोटिस जारी कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट के निर्देश पर शासन ने विशाखा कमेटी का गठन कर मामले की जांच करने के निर्देश दिए। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में आईजी को दोषी पाया, लेकिन शासन द्वारा इस पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई।

गौरतलब है कि तत्कालीन बिलासपुर आईजी पवन देव पर महिला आरक्षक के साथ लैंगिक उत्पीडऩ का आरोप लगा था। शिकायत के बाद उन्हें पुलिस मुख्यालय में अटैच कर दिया गया था। लेकिन, कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई थी। मामले की गंभीरता को देखते केंद्रीय गृह विभाग ने भी मामले की रिपोर्ट मंगवाई थी। कोई कार्रवाही नहीं होने पर पीडि़त आरक्षक ने विभिन्न आयोग में अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। ज्ञात हो कि जनवरी 2017 में डीपीसी के बैठक हुई थी।

बतादें कि 30 जून 2016 को मुंगेली की महिला आरक्षक ने तत्कालीन बिलासपुर आईजी पवन देव पर मोबाइल फोन से अश्लील बातें करने और दबाव पूर्वक अपने बंगले बुलाने का आरोप लगाया था। जुलाई 2016 में डीजीपी ने आईएएस रेणु पिल्ले की अध्यक्षता में 4 सदस्यीय आंतरिक शिकायत समिति का गठन कर शिकायत जांच सौंपी थी। समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट 2 दिसम्बर 2016 को डीजीपी को सौंप दी थी।