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उत्साह के साथ वोटर पहुंचे थे पोलिंग बूथ, लेकिन इस चूक से सैकड़ों मतदाता नहीं डाल सके वोट

इससे आक्रोशित मतदाताओं ने एसडीएम दफ्तर पहुंचकर इसकी शिकायत भी की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

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Chhattisgarh news

उत्साह के साथ वोटर पहुंचे थे पोलिंग बूथ, लेकिन इस चूक से सैकड़ों मतदाता नहीं डाल सके वोट

रायपुर/धमतरी. मतदाता सूची में गड़बड़ी के चलते धमतरी विधानसभा क्षेत्र में सैकड़ों लोग मतदान से वंचित हो गए। घर से मतदाता जब अपना इपिक कार्ड लेकर मतदान केन्द्र पहुंचे, तो वहां सूची में नाम नहीं होने की बात कहकर लौटा दिया गया। इससे आक्रोशित मतदाताओं ने एसडीएम दफ्तर पहुंचकर इसकी शिकायत भी की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

उल्लेखनीय है कि धमतरी विधानसभा क्षेत्र में त्रुटिपूर्ण मतदाता सूची के चलते सैकड़ों लोगों को मतदान से वंचित होना पड़ा। रामसागर पारा निवासी अनुसुईया बाई यादव (60) पति रामज्ञानी यादव (68) तथाउसके पुत्र को मतदाता पर्ची ही नहीं मिली। वे जब इपिक कार्ड और आधार कार्ड लेकर मतदान केन्द्र पहुंचे, तो वहां बैठे बीएलओ ने उन्हें बैरंग लौटा दिया। इसी मोहल्ले के सुरेश ठाकुर और उनके परिवार के सभी 5 सदस्य मतदान से वंचित हो गए। लक्ष्मी बाई ब्राम्हण (45) पति दिनेश तथा पुत्री अस्मिता का भी सूची में नाम नहीं था।

इसी तरह बनियापारा निवासी रामकृष्ण यादव और उसके परिवार के 10 लोग मतदान से वंचित हो गए। नरेश यादव, गंगा बाई, रामकृष्ण, उषा यादव, मनोज, पूजा, रितेश समेत 6 लोगों का नाम भी मतदाता सूची में नहीं था। बनियापारा निवासी कुंती यादव के घर के 5 सदस्य, पोस्ट आफिस वार्ड के महेन्द्र सिंह ठाकुर, पत्नी संध्या, चन्द्रकिरण का नाम भी मतदाता पर्ची में नहीं आया।

इसी बस्ती के अमित सिंह, डिम्पल, अंजना देवी का भी नाम मतदाता सूची में नहीं आया। आमा तालाब स्थित श्रद्धा नगर में सचिन यादव, राम यादव, किशुन यादव, चांदनी यादव का नाम सूची में नहीं होने से वे मतदान नहीं कर सके, जबकि उनके छोटे भाई भूपेन्द्र यादव का नाम ही पर्ची में आया। मतदाता सूची में नाम नहीं आने से आक्रोशित लोगों ने सीधे कलक्टर डा. सीआर प्रसन्ना को मोबाइल लगाकर अपनी नाराजगी भी जताई।

लौटे मायूस होकर
बड़ी संख्या में लोग दोपहर 3 बजे तक एसडीएम दफ्तर स्थित निर्वाचन शाखा का चक्कर काटते रहे, लेकिन यहां से भी उन्हें कोई मदद नहीं मिली। इस तरह शहर के चालीस वार्डों से सैकड़ों की तादात में लोग मतदान से वंचित हो गए। इस तरह उनका लोकतंत्र के इस महोत्सव में अपना बहुमूल्य वोट देकर साक्षी बनने का सपना अधूरा रह गया।