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‘हिप्नोटिज्म कोई जादू नहीं, बल्कि मेडिकल साइंस की एक टेक्निक है’, जानिए इसके फायदेमंद

डॉ. भारद्वाज ने बताया कि करीब 100 साल पहले डॉ. मैस्मर ने इसकी शुरुआत की थी

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'हिप्नोटिज्म कोई जादू नहीं, बल्कि मेडिकल साइंस की एक टेक्निक है', जानिए इसके फायदेमंद

रायपुर. कुछ ऐसे साइकोलॉजिस्ट प्रॉब्लम जिसके सिम्पटम्स बॉडी पर नजर आने लगे ये उसे ठीक करने के लिए हिप्नोटाइज का सहारा लिया जाता है। इसमें उनका इलाज किया जाता है जिनके मन में परेशानी हो। हिप्नोटिज्म साइकोलॉजी का पार्ट है।

कई गंभीर बीमारियों में इस विधा की मदद ली जा सकती है। आज हिप्नोटिज्म डे है। डॉ. संजय भारद्वाज जो इस सबजेक्ट की वर्कशॉप लेते हैं। साथ ही इलाज में इस टेक्निक का इस्तेमाल करते हैं। वे बता रहे हैं कि आखिर हिप्नोटिज्म को लेकर लोगों मेंं संशय क्यों रहता है।

कब स्टार्ट हुआ हिप्नोटिज्म से इलाज
डॉ. भारद्वाज ने बताया कि करीब 100 साल पहले डॉ. मैस्मर ने इसकी शुरुआत की थी। उस वक्त इसे मेस्मिरिज्म के नाम से जाना जाता था। आगे चलकर डॉ. जेम्स ब्रेड इसे हिप्नोटिज्म नाम दिया। उन्होंने बताया कि यह कोई जादू-टोना जैसी चीज नहीं है, बल्कि मेडिकल साइंस का ही पार्ट है। यह पूरी तरह साइंटिफिक प्रोसेस है।

इसमें भी है फायदेमंद
हिप्नोटिज्म के जरिए न सिर्फ मनोवैज्ञानिक बीमारियों का इलाज संभव है, बल्कि परफॉर्मेंस में सुधार, पर्सनालिटी डवलपमेंट और कॉन्फिडेंट बढ़ाने के लिए भी इसकी मदद ली जा सकती है।
कई ऑपरेशन में इस विधा का उपयोग किया जा सकता है। पेन रिलीफ में भी मददगार है। इसकी तीन अवस्था है लेथरजिक, केटाल्प्टुक और सोमंस बिलिज्म।

यह है मिथक, जिसे जानना सबके लिए जरूरी है
डॉ. भारद्वाज ने कहा लोगों में यह मिथ है कि सम्मोहित करने वाला व्यक्ति कुछ भी कर सकता है, जबकि ऐसा नहीं है। जब तक सामने वाले की सहमति नहीं होगी वह हिप्नोटिज्म के लिए तैयार नहीं होगा, सही रिजल्ट नहीं आएगा। मान लो कोई नशे की गिरफ्त में है। उसे कोई लेकर आए लेकिन पीडि़त व्यक्ति की इच्छा नहीं है इस टेक्निक से इलाज कराने की, तो कोई मतलब ही नहीं। दूसरी बात ये कि इस विधा से इलाज करते वक्त व्यक्ति पूरे होश में रहता है। वह ऐसी बातों को भी छिपा सकता है जिसे बताने में उसे हिचक हो रही हो। व्यक्ति जब चाहे ट्रांस (हिप्नोटिज्म) से लौट सकता है।


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