
प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा की पत्रिका के साथ विशेष बातचीत ( Photo - Patrika )
IAS Sonmani Bora: राहुल जैन. नक्सलवाद के साये से मुक्त हो रहे बस्तर में अब खुशहाली की नई इबारत लिखी जा रही है। प्रमुख सचिव (आदिम जाति विकास) सोनमणि बोरा ने 'पत्रिका' से विशेष बातचीत में बस्तर के कायाकल्प का रोडमैप साझा किया। उन्होंने बताया कि सलवा जुडूम के दौरान पलायन कर गए 32 हजार आदिवासियों की घर वापसी के लिए केंद्र के 'रियांग (ब्रू) मॉडल' पर ठोस रणनीति तैयार है।
पीएम जनमन और जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के जरिए अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और वनोपज के सहकारी मॉडल से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाकर मुख्यधारा से जोड़ने की यह सरकारी पहल बस्तर की तस्वीर बदल रही है। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुंख अंश…
प्रश्न: नक्सलमुक्त बस्तर के विकास का रोडमैप क्या है?
जवाब: सरकार बस्तर को सुरक्षा के साथ सर्वांगीण विकास के विजन से देख रही है। पीएम जनमन और जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के जरिए लास्ट माइल कनेक्टिविटी पर फोकस है। अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में पहली बार बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं। शिक्षा के क्षेत्र में 29 एकलव्य आवासीय विद्यालय एक कीर्तिमान हैं, जो बच्चों को वैश्विक स्तर की शिक्षा दे रहे हैं।
प्रश्न: 32 हजार विस्थापितों का पुनर्वास कैसे होगा?
जवाब: पलायन कर चुके 32 हजार आदिवासियों की घर वापसी के लिए केंद्र के 'रियांग (ब्रू) मॉडल' पर रणनीति तैयार है। एक अंतर-विभागीय समिति इस पर काम कर रही है। पुनर्वास के तहत उन्हें न केवल जमीन और आवास दिया जाएगा, बल्कि राशन कार्ड और आयुष्मान कार्ड जैसे नागरिक अधिकार प्रदान कर मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा।
प्रश्न: वनोपज से ग्रामीणों की आय बढ़ाने के लिए क्या सहकारी मॉडल है?
जवाब: हम संग्रहण के बजाय प्रोसेसिंग और बिजनेस मॉडल पर जोर दे रहे हैं। वीडीपी केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण क्लस्टर्स में ही इकाइयां लगाई जा रही हैं। लक्ष्य बिचौलियों को हटाकर मुनाफे का सीधा हिस्सा युवाओं के बैंक खातों में भेजना है, ताकि बस्तर के युवा 'लखपति युवा' बनकर स्वरोजगार से सशक्त हों।
प्रश्न: पेसा कानून की क्या भूमिका है?
जवाब: पेसा और वन अधिकार कानून जनजातीय समाज की रीढ़ हैं। छत्तीसगढ़ एफआरए के क्रियान्वयन में देश में अव्वल है। हम ग्राम सभाओं को वास्तविक शक्तियां सौंप रहे हैं। कानून को किताबी भाषा के बजाय उनके सामुदायिक ज्ञान और रीतियों के साथ लागू किया जा रहा है, जिससे जल-जंगल-जमीन पर आदिवासियों का मालिकाना हक मजबूत हुआ है।
प्रश्न: छात्रावासों और छात्रवृत्ति की स्थिति में क्या सुधार हुआ है?
जवाब: पारदर्शिता के लिए हॉस्टल मैनेजमेंट पोर्टल शुरू किया गया है। अब शिष्यवृत्ति शैक्षणिक सत्र की शुरुआत यानी मई में ही जारी कर दी जाती है। छात्रवृत्ति वितरण को 'समयबद्ध' बनाया गया है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों को बिना दफ्तरों के चक्कर लगाए उनका हक सीधे उनके बैंक खातों में मिल रहा है।
Updated on:
12 Apr 2026 01:54 pm
Published on:
12 Apr 2026 01:53 pm
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