
रायपुर। खेतों में फसलों को कितना पानी, खाद और दवा चाहिए, इसकी जानकारी इंदिरा गांधी कृषि विवि (IGKV) में इसरो की मदद से लगे सेंसर से मिलेगी। राजधानी स्थित कृषि विश्वविद्यालय में इसरो से मदद से यह मशीन स्थापित कर दी गई है। कृषि विवि के वैज्ञानिकों ने बताया कि कृषि विवि परिसर में एडी कोवरियन्स फ्लक्स टॉवर और मृदा नमी सेंसर की स्थापना की गई है।
इस तकनीकी मदद से फसल के तैयार होने तक 5-5मिनट में पल-पल की जानकारी सेंसर के माध्यम से वैज्ञानिकों को कम्प्युटर स्क्रीन पर मिलेगी। इस पूरी प्रक्रिया में फसल रोपे जाने से पकने तक डेटाबेस बीजों के आधार पर किसानों को बताया जाएगा। रेकॉर्ड से किसान कृषि विवि में तैयार बीज को इस्तेमाल कर सकेंगे। इस तकनीक के जरिए फसलों में गैसीय प्रभाव की जानकारी में भी मदद मिलेगी।
कार्बनडाइऑक्साइड की मात्रा भी पता चलेगी
कृषि वैज्ञानिकों (IGKV) के अनुसार फसल से कार्बन डाइऑक्साइड उत्र्सजन की जानकारी भी मिलेगी। वैज्ञानिक डाटा की मदद से फसल से उत्सर्जित होने वाले अन्य गैसीय प्रभावों का भी अवलोकन करेंगे। इससे वायुमंडल में प्रवाहित गैसीय तत्वों की गणना भी की जा सकेगी।
इसरो और विवि के बीच 4 साल का एमओयू
इसरो की मदद से इस टॉवर को स्थापित किया गया है। इसरो और विवि के बीच 4 साल का एमओयू हुआ है। एमओयू के तहत विवि प्रबंधन ने उन्हें यह तकनीक स्थापित करने के लिए जमीन दी है। इसरो और कृषि विवि स तकनीकी मदद से फसल के तैयार होने तक 5-5मिनट में पल-पल की जानकारी सेंसर के माध्यम से वैज्ञानिकों को कम्प्युटर स्क्रीन पर मिलेगी। इस पूरी प्रक्रिया में फसल रोपे जाने से पकने तक डेटाबेस बीजों के आधार पर किसानों को बताया जाएगा। के वैज्ञानिकों द्वारा संयुक्त रूप से इस प्रोजेक्ट का अध्ययन किया जाएगा। तकनीकी का प्रदेश के किसानों को किस तरह फायदा दिलाया जा सकता है। इस पर भी लगातार रिसर्च होंगे। रिसर्च से उत्कृष्ट बीजों को तैयार करने में भी बड़ी मदद मिलने की संभावना जताई जा रही है।
Published on:
23 Jan 2022 10:54 pm
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