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भारत का ऐसा गांव जहां हर घर का बेटा फौज में है भर्ती, अब तक एक की भी नहीं हुई शहादत

Independence Day 2021 : एक किसान का बेटा अभी दो साल पहले ही फ़ौज में भर्ती हुआ। वर्तमान में ये जवान गलवान घाटी से 15 किमी एक जगह पर पोस्टेड है।

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75th independence day 2021 : रायपुर। देश के लिए मिटने की अनेक कहानियां अपने सुनी, पढ़ी होगी। भारत का प्रत्येक व्यक्ति प्रतक्ष्य या अप्रतक्ष्य रूप से देश की सेवा कर रहा है। आजादी के 75वें साल की जश्न के मौके पर हम छत्तीसगढ़ के एक ऐसे गांव के बारे में बताएंगे जहाँ गांव के प्रत्येक घर का युवा देश सेवा में लगा हुआ है। देश प्रेम की भावना से ओत प्रोत इस गांव के युवा फ़ौज, पुलिस सेवा में है।

बिलासपुर जिले से करीब 55 किमी दूर और मुंगेली जिले की सीमा पर बसा है हथनी कला गांव। इस गांव के पूरे प्रदेश में चर्चे हैं। यहां हर घर का युवा फौज में भर्ती है। अगर आप किसी बच्चे से भी पूछेंगे तो वह भी डॉक्टर इंजीनियर बनने की बात न करते हुए फौज में जाने की बात कहेगा। अन्य गांवों की तरह ही इस गांव में भी लोग खेती-किसानी कर जीवनयापन कर रहे हैं। इस गांव की आबादी तकरीबन 5 हजार के आसपास होगी।

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ऐसे मिली फौज में जाने की प्रेरणा
3 दशक पहले कवर्धा के रहने वाले एक जवान के जुनून से ये गांव ऐसा प्रभावित हुआ कि आज गांव के हरेक घर से एक युवा फ़ौज तो कोई पुलिस सेवा के जरिये देश भक्ति जन सेवा में लगा हुआ है। गांव में राजपूत, ठाकुर लोगों की बाहुल्यता है। अधिकतर लोग खेती बाड़ी से जुड़े हैं, लेकिन युवा पीढ़ी का लगाव खेती बाड़ी के साथ साथ फ़ौज में रहकर भारत माता की सेवा (happy independence day) में भी है।

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गांव के फौजी युवा जब छुट्टियों में घर आते हैं तो वे गांव की मेड और पगडंडी के साथ ही नहर के किनारे सुबह-शाम ऐसे युवाओं को ट्रेनिॆग देकर तैयार करते हैॆ। फौज में जाने की इच्छा रखने वाले युवा उनसे ट्रेनिंग लेने पहुंच जाते हैं।

गांव के वीरेंद्र सिंह राजपूत जिनके बड़े भाई फ़ौज से कुछ समय पहले की रिटायर हुए है। फ़ौज में रहने से लेकर अब तक उनके भाई गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। एक समय था जब वे सैनिक की वर्दी पहनकर छुट्टियों में घर लौटते थे तो गांव के युवा उनसे फ़ौज के बारे में पूछा करते थे। अब तो स्थिति ऐसी है कि गांव के अधिकतर लोगों को फ़ौज में जाते देखकर गांव का हर युवा नौकरी की उम्र तक पहुंचते ही फ़ौज में जाने की तैयारी शुरू कर देता है। वीरेंद्र के भाई आर्मी में कमांडेट थे। रिटायरमेंट होने से कुछ समय पहले वे इजरायल में शांति दूत बनकर गए थे और इजरायली सैनिकों को उन्होंने ट्रेनिग भी दी थी। उनके इस काम से पूरा गांव और वीरेंद्र के घर वाले अपने आपको गौरवांवित महसूस करते है।

गलवान घाटी में पोस्टेड है कवर्धा का जवान
इस गांव से लगे मुंगेली जिले के रोहरा गांव में एक किसान का बेटा अभी दो साल पहले ही फ़ौज में भर्ती हुआ। वर्तमान में ये जवान गलवान घाटी से 15 किमी एक जगह पर पोस्टेड है। किसान के बड़े बेटे के अलावा उनका छोटा बेटा भी फ़ौज में जाने की तैयारी कर रहा है। विशाल बी ए की पढ़ाई करने के दौरान ही सेना में जाने की तैयारी करने लगे थे। जबलपुर में उन्होंने परीक्षा दी और सलेक्ट होने पर 49 रेजिमेंट में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। विशाल इस समय छुट्टियों पर घर आये हुए हैं। इस दौरान गांव में जो जवान सेना में जाने की इक्छा रखते है उन्हें वे तैयार कर रहे हैं।

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फौजी गांव से पहचाने जाने वाले इस गांव सीमा पर प्रवेश करने के दौरान एक विशाल दुर्गा मंदिर है। जिसके बारे में मान्यता है कि इस मंदिर की खासियत ये है कि इस दरबार से आशीर्वाद लेकर फ़ौज में जाने के बाद आज तक किसी भी जवान की शहादत नहीं हुई। बहरहाल देश भक्ति के प्रेम भावना से भरे इस गांव को सेल्यूट जहाँ का हर नॉजवां भारत माता की सेवा करने को तैयार है।

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