
9 देशों के एम्बेसडर रह चुके मलय पहुंचे रायपुर, बोले- सीएए और एनआरसी से भारत की छवि बिगड़ी
ताबीर हुसैन @ रायपुर।हमारे देश में क्या हो रहा है यह किसी से छिपा नहीं है। सोशल मीडिया का जमाना है। कोई भी बात चंद सेकंड में दुनियाभर में पहुंच जाती है। सीएए और एनआरसी को लेकर हो रहे विवाद के चलते दुनिया में भारत की छवि को नुकसान हो रहा है। हालांकि भारत सरकार इस दिशा में कोई खास कदम नहीं उठा रही। ये जरूर है कि भारतीय दूतावासों से कहा गया है कि अगर कोई क्योरी आती है तो उन्हें बताएं कि हमने यह कदम क्यों उठाया। बैकग्राउंड पेपर भी दिया गया है। क्यों हमने सिटीजन एक्ट को अमेंट किया है। यह कहना है अमरीका, ईरान, फ्रांस, अफ्रीका, हंगरी, ट्रिनिडेड एंड टौबेगो, सेशल्स, मॉरिशस, सेनेगल में भारत के एम्बेसडर रह चुके मलय मिश्रा का। रिटायर्ड आईएफएस मिश्रा ने 27 साल अब्रॉड और 7 साल दिल्ली में सर्विस की। वे एनआईटी में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने रायपुर आए थे। इस दौरान उन्होंने पत्रिका से अमरीका-ईरान के तल्ख रिश्ते, सीएए-एनआरसी का विदेश में हो रहे असर पर खुलकर बात रखी।
किसी से छिपा नहीं है कुछ
मिश्रा ने कहा, आप कश्मीर में क्या करते हैं, आप जामिया मीलिया में क्या करते हैं या जेनयू में क्या हो रहा है। सारी बातें इमिजेट पहुंच जाती हैं। आपको देश को अच्छी तरह से रखना चाहिए। जनसाधारण की समस्याओं को सुनना चाहिए। उनको सुनें। सुझाव मांगें। ये सरकार को करना चाहिए जिससे भारत का इमेज बढ़ेगा। आप ग्लोबाल पोजिशन को आगे बढ़ा पाएंगे। भारत में डोमेस्टिकली पॉलिसी का डायरेक्ट इंपेक्ट फॉरेन पॉलिसी पर पड़ता है। अभी हमारी इकानॉमी कमजोर है। जो यहां हो रहा है वह किसी से छिपा नहीं है। सोशल मीडिया के चलते चीजें फौरन यहां से वहां पहुंच जाती हैं। विदेश में हमारी इमेज सुधारने में कुछ पॉजिटिव कदम उठाने होंगे।
रायसीना डायलॉग में हमिज करजाई ने पूछा था मुस्लिम क्यों नहीं?
मलय ने बताया कि हाल ही में दिल्ली में विदेश मंत्रालय की ओर से आयोजित रायसीना डायलॉग में अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति ने पूछा था कि सभी के लिए रास्ते खुले हैं तो मुस्लिमों के लिए क्यों नहीं। मलय ने बताया कि भारत का
अफगानिस्तान, बांग्लादेश से बहुत करीब का रिश्ता है। अफगानिस्तान के लिए तो भारत ने बहुत खर्च किया है। एक हिसाब से अफगानिस्तान का पुननिर्माण किया है। ऐसे में रिश्ते बिगाडऩा मेरे हिसाब से तो सही नहीं है।
अमरीका और ईरान की खटास से भारत का नुकसान
इस वक्त भारत का सबसे बड़ा दोस्त अमरीका है। दोनों के बीच ट्रेड, स्पेस, डिफेंस और स्ट्रेजिक रिलेशन हैं। दोनों हमारे अच्छे दोस्त मैं दोनों देश में काम मैं अमरीका में 3 और ईरान में साढ़े तीन रहा। दोनों देश भारत के क्लोज हैं। भारत के प्रति सम्मान है दोनों देशों में इंडियन कम्युनिटी है। आइडियली हम नहीं चाहेंगे किसी भी देश के साथ रिश्ते बिगड़े पर रियली क्या होगा ये कहा नहीं जा सकता। अमरीका अगर ईरान पर दबाव बढ़ाता है तो इंडिया पर प्रेशर बढ़ेगा। लेकिन इरान कुछ न कुछ कर देगा इरान व गल्फ कंट्रीज में करीब 60 लाख इंडियंस हैं। ईरान को परेशानी होगी तो वहां रह रहे भारतीयों को तकलीफ होगी, वे भी चाहेंगे कि हमको रेस्क्यू करो। ऐसे में भारत पर दबाव लाजिमी है। हमारे यहां तेल ईरान, और सउदी से आता है। वे अगर चोक कर दिए गए तो तेल कैसे आएगा। 80 परसेंट फ्यूल की आवक वहीं से है। तेल के चलते महंगाई बढ़ेगी।
चीन से विवाद के लिए ब्रिटिश जिम्मेदार
अंग्रेजों ने मैकमोहन लाइन खीचीं थी जिसे चीन ने कभी स्वीकार नहीं किया। चीन से हमें समझौता करना चाहिए। चीन के रिश्तों को लेकर पं. नेहरू नहीं बल्कि ब्रिटिश गवर्नमेंट जिम्मेदार है।
मेन स्ट्रीम में आएगा कश्मीर
कश्मीर पर बहुत ज्यादा खर्च हो रहा है। चूंकि धारा 370 यूनियन टेरेटरी बनाने से पहले जनता कश्मीर से 370 सभी चाह रहे थे क्यों है टेंपेरेरी प्रोविजन था। इसे हटाने से वहां डेवलपमेंट की उम्मीद जताई जा रही है। आने वाले दिनों में कश्मीर मेन स्ट्रीम में आएगा। धारा 370 हटाकर इसे यूनियन टेरेटरी बना दिया, यह जाने बिना कि कश्मीर की जनता सहमत है या नहीं। इंटरनेट बंद कर दिया। थोड़े लोग बगावत करे उसके लिए पूरी कश्मीर के लोगों को अपने-अपने घरों में बंदी नहीं कर सकते।
सोशल जस्टिस पर पीएचडी
मलय 2015 में रिटायर हुए। वे हंगरी से सोशल जस्टिस पर पीएचडी कर रहे हैं। थीसीस खत्म हो चुकी है। इंटरव्यू देने हंगरी जाएंगे। हंगरी में रोमा कम्युनिटी दलित की तरह रहते हैं। वहां उनका शोषण किया जा रहा है। यहां इस कम्युनिटी के लोग पहले की अपेक्षा इम्पॉवर हो गए हैं। वहां उन्हें संविधान से प्रोटेक्ट नहीं है बल्कि इंडिया में काफी संरक्षण है। यूरोप के साथ मिलकर यहां और वहां की प्रैक्टिस का आदान-प्रदान किया जा सकता है।
पहले भी टफ था यूपीएससी
मलय ने बताया कि यूपीएससी जितना टफ आज है पहले भी वैसा ही था। फर्क ये है कि पहले प्रीलिम्स नहीं था, रिटर्न और इंटरव्यू देना होता था। अब ऑब्जेक्टि ज्यादा है पहले सबजेक्टिव हुआ करता था।
Updated on:
25 Jan 2020 02:09 pm
Published on:
25 Jan 2020 01:24 am
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