रायपुर

Indra Priyadarshini Scam : अनुपस्थित आरोपियों पर HC सख्त, बेल याचिका होगी खारिज, 12 साल से गायब हैं 15 आरोपी

Indra Priyadarshini Bank Scam : प्रदेश के बहुचर्चित इंदिरा प्रियदर्शनी बैंक घोटाले में शामिल आरोपियों के 15 सितंबर को उपस्थित नहीं होने पर उनकी जमानत खारिज होगी।

3 min read
Aug 27, 2023
Indra Priyadarshini Bank Scam : अनुपस्थित आरोपियों पर HC सख्त, बेल याचिका होगी खारिज 12 साल से गायब हैं 15 आरोपी

रायपुर. प्रदेश के बहुचर्चित इंदिरा प्रियदर्शनी बैंक घोटाले में शामिल आरोपियों के 15 सितंबर को उपस्थित नहीं होने पर उनकी जमानत खारिज होगी। सीजेएम भूपेश कुमार बसंत की अदालत में शनिवार को सुनवाई हुई। इस दौरान 12 आरोपियों में केवल उमेश सिन्हा और सुलोचना आडिल उपस्थित हुई।

इस दौरान विशेष लोक अभियोजक संदीप कुमर दुबे ने न्यायाधीश को बताया कि इंदिरा प्रियदर्शनी बैंक घोटाले के एक प्रकरण में 15 से ज्यादा आरोपी बनाए गए है, इसमें से 3 आरोपी फरार और 12 आरोपी जमानत पर है। इस प्रकरण की सुनवाई के दौरान केवल 2 आरोपी ही उपस्थित होते हैं।

10 अन्य आरोपी बीमारी का बहाना बनाकर सुनवाई में नहीं आते है। यह सिलसिला पिछले 12 साल से चल रहा है। बैंक घोटाले के आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट द्वारा इस शर्त पर जमानत दी गई है कि वह अगली बार कोर्ट में सुनवाई के दौरान उपस्थित रहेंगे। वहीं पुलिस को जांच में सहयोग करेंगे।

न्यायाधीश ने अभियोजन पक्ष की दलील को गंभीरता से सुनने और अदालत की अवहेलना करने पर सभी आरोपियों को एक आखिरी मौका देते हुए समंस जारी किया है।

इसमें कहा गया है कौन सी बीमारी है जिसके कारण वह सुनवाई में उपस्थित नहीं हो रहे है। इसे स्पष्ट करने के लिए मेडिकल बोर्ड के प्रमाण के साथ ही उपस्थित दर्ज कराएं।

ये हैं आरोपी

इंदिरा प्रियदर्शनी बैंक मैनेजर उमेश सिन्हा, उपाध्यक्ष सुलोचना आडिल, किरण शर्मा, दुर्गा देवी, सविता शुक्ला, सरोजनी शर्मा, नीरज जैन, रीता तिवारी, संगीता शर्मा एवं अन्य शामिल हैं।

बता दें कि इसमें से केवल उमेश सिन्हा और सुलोचना आडिल कोर्ट में उपस्थित होते हैं। वहीं अन्य आरोपियों की ओर से उनके अधिवक्ताओं द्वारा धारा 317 दप्रस के तहत आवेदन पेश किया जाता है। इसमें बीमार होने के कारण अपने पक्षकार को उपस्थित होने में असमर्थ बताया जाता है।

2006 में इंदिरा प्रियदर्शनी बैंक में 54 करोड़ रुपए से ज्यादा का घोटाला हुआ था। इसमें 30 हजार खाते धारकों की बैंक में जमा रकम डूब गई थी। इस दौरान तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा कोई सख्ती नहीं बरती गई।

इसके चलते किसी भी खाताधारक को रकम वापस नहीं मिली। 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद बैंक घोटाले की जांच करने के आदेश दिए गए। इसके बाद कोर्ट और पुलिस ने इसमें शामिल सभी आरोपियों को नोटिस जारी किया।

इसकी तामिली होते ही बैंक में फर्जी दस्तावेज के आधार पर क्रेडिट लेने वाले 4 कारोबारियों ने 1.43.50000 करोड़ रुपए जमा कराया। बता दें कि बैंक से लोन लेने वालों में छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के 35 कंपनिया शामिल हैं।

12 साल से गायब हैं आरोपी

बैंक घोटाले में शामिल 15 आरोपी पिछले 12 साल से कोर्ट में चल रही सुनवाई में नहीं आ रहे है। जबकि इसमें से अधिकांश को सार्वजनिक स्थल और हाईकोर्ट में देखा गया है। लेकिन, रायपुर के विचारण कोर्ट में बीमारी का हवाला देकर सुनवाई में नहीं पहुंचते है।

बता दें कि इसे देखते हुए रायपुर सीजेएम कोर्ट ने आरोपियों के अधिवक्ताओं से पूछा है कि वह आखीर कौन से गंभीर बीमारी से जूझ रहे है। जिसके चलते कोर्ट आने में असमर्थ है।

खाताधारकों की बन रही सूची

विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि बैंक के खाते धारकों को रकम लौटाने के लिए उनकी सूची बनाई जा रही है। इसमें ब्योरा जुटाया जा रहा है कि इस समय कितने खाताधारक जीवित है और कितने की मृत्यु हो चुकी है।

उनके नॉमिनी और जमा रकम की जानकारी एकत्रित की जा रही है। बता दें कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा घोषणा की गई है कि जितने भी बैंक खातेधारक है उन्हें उनकी रकम लौटाई जाएगी।

Updated on:
27 Aug 2023 12:41 pm
Published on:
27 Aug 2023 12:38 pm
Also Read
View All

अगली खबर