राइटिंग व डायरेक्शन के साथ ही प्रोड्यूस भी खुद करूंगा। यहां कल्चर और मसाला बेस्ड फिल्में चलती हैं जिसे मैं रीलेट कर सकता हूं। इसी सिलसिले पर मैं रायपुर आया हूं।
ताबीर हुसैन@रायपुर । छत्तीसगढ़ी फिल्में (Chhattisgarhi Film) लगातार धड़ाम हो रही हैं, ऐसे में दूसरे राज्य के मेकर्स इंट्रेस्ट लेने लगें तो नए फ्लेवर की उम्मीद की जा सकती है। कंतारा और केेजीएफ-2 समेत कई प्रोजेक्ट के डबिंग इंजीनियर रह चुके मनोरंजन दास रायपुर पहुंचे। कारण पूछने पर बताया कि मैं एक छत्तीसगढ़ी फिल्म बनना चाहता हूं। राइटिंग व डायरेक्शन के साथ ही प्रोड्यूस भी खुद करूंगा। यहां कल्चर और मसाला बेस्ड फिल्में चलती हैं जिसे मैं रीलेट कर सकता हूं। इसी सिलसिले पर मैं रायपुर आया हूं।
बीच में ही छोड़ दी थी पढ़ाई
दास ने बताया, मैं पहले हार्डवेयर इंजीनियरिंग कर रहा था। इसमें आगे भी बढ़ना चाहता था लेकिन आर्थिक दिक्कतों के चलते बीच में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी। इसके बाद रिकॉर्डिस्ट इंजीनियर कई साल काम किया। तजुर्बा बढ़ते गया और मैंने राइटर व डबिंग डायरेक्टर प्रोजेक्ट संभालने लगा। मेरा पहला फिल्मी प्रोजेक्ट था फाइनल डेस्टिनेशन 3, इसे मैंने हिंदी में डब करवाया था। इसके बाद कई प्रोजेक्ट किए।
दास ने कहा कि डबिंग इंडस्ट्री में अच्छा स्कोप है। बॉलीवुड मूवी से ज्यादा डबिंग में ऑडियो प्रोडक्शन का बजट रहता है। एजुकेशन हर फील्ड में जरूरी है। लेकिन अनुभव इससे बड़ी चीज है। खुद के इनपुट बहुत महत्त्वपूर्ण है। जिस प्रोडक्शन ने केजीएफ बनाया, उसी ने कंतारा बनाया। उनकी जितनी भी फिल्में हैं मैं ही करता हूं। इस फील्ड में अच्छी संभावनाएं हैं। डिमांड के मुताबिक प्रोफेशनल्स की कमी है।
कुछ प्रमुख प्रोजेक्ट
वंस अपॉन ए टाइम इन हॉलीवुड, केजीएफ, कंतारा। अभी साउथ के कई बड़े प्रोजेक्ट मेरे ही पास हैं। मैंने राइटिंग में भी काम किया हुआ है इसलिए छत्तीसगढ़ी फिल्म कर सकता हूं। अभी स्क्रिप्ट पर काम चल रहा है। अनुवाद के लिए स्थानीय मदद लूंगा