रायपुर

Chaturmas Pravachan : प्रवीण ऋषि ने कहा, रिश्तों में अपनी भावना का ख्याल रख बदल सकते हैं कर्म और धर्म

Chaturmas Pravachan : रिश्ते पुण्य कर्मों और पाप को भी समाप्त कर सकते हैं। रिश्ते कर्म और धर्म को बदल कर रख सकते हैं।

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Sep 02, 2023
Chaturmas Pravachan : प्रवीण ऋषि ने कहा, रिश्तों में अपनी भावना का ख्याल रख बदल सकते हैं कर्म और धर्म

Chaturmas Pravachan : रिश्ते पुण्य कर्मों और पाप को भी समाप्त कर सकते हैं। रिश्ते कर्म और धर्म को बदल कर रख सकते हैं। रिश्तों में आप यह नहीं जान पाते कि सामने वाला आपके प्रति क्या भावना रखता है, लेकिन आप अपनी भावना का ख्याल रख सकते हैं। उक्त बातें उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि ने लालगंगा पटवा भवन में चल रही महावीर गाथा के 54वें दिन कहीं। संत ने कहा कि कर्म को लेकर एक प्रचलित धारणा है कि कर्म भोगे बिना मोक्ष नहीं मिलता है। उन्होंने कहा कि अगर पुराने पाप धोये जा सकते हैं तो भोगने की आवश्यकता क्यों? मिथ्या दृष्टि वाले को कर्म भोगना ही पड़ता है।

भगवान महावीर कहते हैं कि कर्म के आगे झुकना नहीं, कर्म तुम्हारा गुलाम है, तुम उसके नहीं। आपको यह सोचना है कि कर्म मुझे नचाने वाला नहीं है, बल्कि मैं कर्म को नचाने वाला हूं। धर्म, कर्म को भोगने के लिए नहीं है, बल्कि धर्म तो कर्मों का क्षय करने के लिए है। कर्म को चुनौती दीजिए, विजयी बनने की मानसिकता के साथ। रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने बताया कि प्रवीण ऋषि ने इस सोच को बदलने के लिए और कर्म को चुनौती देने के लिए खुद को तैयार करने अर्हम सीक्रेट्स ऑफ़ कर्मा शिविर शुरू किया है। रायपुर में भी यह शिविर जारी है और 2 सितंबर को ट्रेनर्स को सर्टिफिकेट सौंपे जाएंगे।

श्रमण संघ का पर्यूषण पर्व 12 सितम्बर से

रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने बताया कि 12 सितंबर से पर्यूषण पर्व शुरू हो रहा है। प्रवीण ऋषि इस बार पर्यूषण पर्व को ख़ास बनाने वाले हैं। पर्यूषण पर्व से पहले 10 सितंबर को उपाध्याय प्रवर बताएंगे कि हम पर्यूषण पर्व क्यों मनाते है। वहीं 11 सितंबर को बताएंगे कि पर्यूषण पर्व कैसे मनाते हैं। उन्होंने कहा कि पर्यूषण पर्व पहले है, जैन धर्म बाद में।

एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी में गुरुवार को साध्वी शुभंकरा ने कहा कि पानी को चाहे कितना पिलोए मक्खन नहीं निकलेगा। वैसे ही कोई व्यक्ति किसी भाव को कितना भी पिलोए, सांसारिक सुख उसे नहीं मिल सकता। क्योंकि सुख और आनंद आपके अंदर ही है।

साध्वी ने कहा हमें कर्म सिद्धांत का अध्ययन करना है क्योंकि पढ़ना और समझना केवल मनुष्य जीवन में ही संभव है यह और किसी भव में कोई नहीं कर सकता है। आत्मा अकेले ही कर्म नहीं पढ़ सकती है उसके साथ कर्म भी मिक्स होता है। आपके घर में धूल बहुत आती है तो क्या आप पूरे धूल को खत्म कर सकते हैं, यह कभी संभव ही नहीं है। आत्मा अपने आप में शुद्ध है यह तो राग और द्वेष से घिरी हुई है, जिसकी वजह से कर्म बंधते हैं। यह कर्म हमें दिखाई नहीं देते पर वह स्टॉक में जमा होते जाते हैं।

Published on:
02 Sept 2023 11:12 am
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