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जानव का हे भाजी खाए के फायदा, कमरछठ म उपसनीनमन खाथें किसम-किसम के भाजी

करेला भाजी ह मधुमेह रोगी बर काम आथे। पीपल भाजी- पीलिया के दवाई के रूप म परयोग म लाए जाथे। पत्ता गोभीभाजी- लीवर के टॉनिक के रूप में काम करथे। कुसुम भाजी- पीलिया म उपयोग, अउ डाई घलो बनाए जाथे। चरोटा भाजी- पेट के करिमि नासक के काम आथे। कनसुइया भाजी- एसिडिटी,आंख बर लाभदायक होथे।

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जानव का हे भाजी खाए के फायदा, कमरछठ म उपसनीनमन खाथें किसम-किसम के भाजी

जानव का हे भाजी खाए के फायदा, कमरछठ म उपसनीनमन खाथें किसम-किसम के भाजी

छत्तीसगढ़ म ‘कमरछठ तिहार’ म भाजी अउ पसहर चाउर खाय के रिवाज हे। पांच कोरी पउधामन के पत्ता ल छत्तीसगढ़ म भाजी के रूप में खाए जाथे। ऐ भाजीमन म रोग नास के संग-संग विटामिन, पौस्टिक तत्व के सग गुत्तुर सुवाद घलो रहिथे। कुछ गिने-चुने भाजीमन के बारे म बतावथंव। सेमी भाजी ले रजत भस्म बनाए जाथे। कौआ भाजी पाचन म उपयोगी होथे। कुंदरू भाजी कान पीरा म उपयोगी। सिलीयारी भाजी मुंह के छाला बर परयोग म लाए जाथे। कुरमा भाजी पेट ल ठंडा रखथे। जिल्लो भाजी पीलिया म उपयोगी होथे। लौकीभाजी. ब्लड प्रेसर कम करथे। आलू भाजी म कारबोहाइडरेट मिलथे। हसिया डाफर भाज म करिमिनासक होथे। तिनपनिया भाजी म विस उतारथे। लीम भाजी- मधुमेह और दातुन के रुप में काम आथे। लहसुन भाजी ह हिरदय रोग दूर करे म सहायक होथे।

कमरछठ के आ गे बेरा।
भाजी खाबो कोरा-कोरा।

करेला भाजी ह मधुमेह रोगी बर काम आथे। पीपल भाजी- पीलिया के दवाई के रूप म परयोग म लाए जाथे। पत्ता गोभीभाजी- लीवर के टॉनिक के रूप में काम करथे। कुसुम भाजी- पीलिया म उपयोग, अउ डाई घलो बनाए जाथे। चरोटा भाजी- पेट के करिमि नासक के काम आथे। कनसुइया भाजी- एसिडिटी,आंख बर लाभदायक होथे। मुस्कैनी भाजी - खून बढ़ाए बर काम आथे। चना भाजी - लू लगे म ऐकर लेप लगाथें। चेंच भाजी- एसिडिटी दूर करेथे। करमत्ता भाजी- चेचक से बचाव अउ मासिक धरम म अनिमितता ल दूर करथे।

कोचई भाजी -पेट के विकार ला दूर करथे। गुमि भाजी- पेट के असाध्य रोग दूर होथे - चौलाई भाजी- लहू के कमी ल दूर करथे। मुरई भाजी- पाचन म उपयोगी रहिथे। पालक भाजी-रक्तवरधक होथे। सरसों भाजी -कब्ज निवारक होथे। तिवरा भाजी- लहू संचार म सहायक होथे। चिरचिड़ा भाजी- हैजा दूर करे बर काम आथे। भेंगरा भाजी- उदर सूल भगाथे। मोखला भाजी- बेमची, रोग जलोदर रोग म उपयोगी रहिथे। अजवाइन भाजी- सरदी-जुकाम म उपयोगी रहिथे। धनबोहार भाजी- विटामिन ए से भरपूर होथे। कउह भाजी। नूनिया भाजी- घाव भरे बर काम आथे।

ऐखर भाजी घलो सबले बढ़िया।।
बथुआ भाजी .मैग्नीशियम से भरपूर होथेए कृमि नाशक घलो रहिथे।
पाताल भाजी .विटामिन सी भरपूर।
उड़द भाजी. एखर ले हरा रंग घलो मिलथे। पेट ला ठंडा रखथे।
केनी भाजी .एखर ले आयरन एलोहा मिलथे ।
बोहार भाजी .मूत्र रोग ताप नाशक के रूप में परयोग आथे।
कुम्हरा भाजी .पेट बर लाभदायक रहिथे।
चुनचुनिया भाजी .पेरासिटामोल के गुण होए के खातिर नीद अच्छा आथे।
कोलियरी भाजी. डायरिया के रोग में उपयोगी सिद्ध होथे।
मुनगा भाजी .आयरन एफास्फोरसए विटामिन ए और बी होथे ऐ हर कफ नाशक घलो रहिथे।
मेथी भाजी .शुगरए गठिया में आराम मिलथे ।
लाल भाजी ..आयरन बढ़ाए पर उपयोगी।
पोई भाजी. कब्ज ला दूर करथे।
एखर अलावा अऊर बहुत से गाड़ा भर भाजी हावे । अपन छत्तीसगढ़ में ही नही बल्कि अऊर परदेस में ऐ भाजी ला खाये जाथे।

छत्तीगढ़िया सबले बढ़िया ।

श्रीमती रजनी शर्मा बस्तरिया, 116 सोनिया कुंज
देशबंधु प्रेस के सामने, रायपुर छत्तीसगढ़
मोबाइल 93018 36811

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