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बेहद लाजवाब होता है कोलियारी भाजी का स्वाद, खून से जुड़ी दिक्कतें होती हैं दूर, जानिए और भी हैं कई फायदे

Koliari Bhaji: कोलियारी भाजी(Koliari Bhaji) को कई जगहों पर कचनार भाजी के नाम से भी जाना जाता है। इसकी छाल और तने का इस्तेमाल कई बीमारियों को दूर करने के लिए भी किया जाता है। कोलियारी भाजी खाने से गठिया से जुड़ी परेशानियां दूर हो जाती हैं।

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 कोलियारी भाजी

कोलियारी भाजी फ़ाइल फोटो

Koliari Bhaji: कोलियारी भाजी(Koliari Bhaji) को कई जगहों पर कचनार भाजी के नाम से भी जाना जाता है। कोलियारी भाजी का वानस्पतिक नाम बुहिनिया पुरपुरिया है। कचनार भाजी के वानस्पतिक नाम से यह सब्जी ताइवान, मलेशिया जैसे देशों में भी बड़े चाव से खाई जाती है। इस सब्जी के कोमल पत्ते ही नहीं बल्कि इसके सफेद, गुलाबी, पीले, नीले, लाल रंग के फूल भी आपका मन मोह लेंगे।

कचनार भाजी(Koliari Bhaji)की पत्तियों और फूलों की कलियों को गर्मियों में भाजी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। यह एक ऐसा पेड़ है जिसके पत्तों और फूलों का इस्तेमाल किया जाता है, इसकी छाल और तने का इस्तेमाल कई बीमारियों को दूर करने के लिए भी किया जाता है। इस भाजी को आप सिर्फ टमाटर ही नहीं दही और छाछ से भी बना सकते हैं, इस भाजी का स्वाद बेहद लाजवाब होता है।

अरहर की दाल से उड़द की दाल, मसूर की दाल, चना की दाल, कचनार भाजी(Kachnar Bhaji) के साथ बनाई जाती है। कचनार भाजी की कली की सब्जी बनाई जाती है लेकिन इसके अतिरिक्त इसका अचार और रायता भी काफी स्वादिष्ट होता है। अगर आप भी सब्जी बनाना चाहती है तो इसके लिए आपको ज्यादा कुछ नहीं करना पड़ेगा बस आपको टमाटर या दही दाल के साथ डाल देना होगा। फिर भाजी को उबाल कर सूखी मिर्च और लहसुन में छिड़क दीजिए। आपके द्वारा की गई बस इतनी ही मेहनत और स्वाद में हेल्दी भाजी बनकर तैयार हो जाती है।

Koliari Bhaji: कचनार भाजी के फायदे
कचनार भाजी(Kachnar Bhaji) या कहें कोलियारी भाजी में पर्याप्त मात्रा में आयरन, प्रोटीन, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है। साथ ही कोलियारी भाजी (Koliari Bhaji) की छाल के इस्तेमाल से शरीर में कोई गांठ हो तो उसे भी ठीक किया जा सकता है।

Koliari Bhaji: कचनार की सब्जी की छाल
आपको बता दें कि कोलियरी भाजी(Koliari Bhaji) की सब्जी की छाल में काफी मात्रा में कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है। साथ ही साथ शरीर में यदि कोई गांठ हो तो कचनार भाजी की छाल के इस्तेमाल से उसे भी एकदम ठीक किया जा सकता है।

Koliari Bhaji: चर्म रोगों से दिलाता है राहत
यदि आप और हम मिलकर भी इस भाजी (Kachnar Bhaji) के फायदों की लिस्ट बनाए तो वह लिस्ट बहुत लंबी हो जाएगी। कोलियारी (Koliari Bhaji) की छाल न केवल एक्जीमा और चर्म रोगों से हमें राहत दिलाता है बल्कि खून से जुड़ी दिक्कतें भी कचनार के इस्तेमाल से बिलकुल ठीक हो जाती है। कोलियारी भाजी न केवल जोड़ों के दर्द के लिए अमृत के समान मानी जाती है वरन इसे खाने से गठिया से जुड़ी परेशानियां भी दूर हो जाती हैं।

Koliari Bhaji: जानिए कैसे बनती है कोलियारी भाजी
छत्तीसगढ़ में कोलियारी भाजी(Koliari Bhaji) को बहुत चांव से खाई जाती है। कोलियारी भाजी के पत्ते हरे होते हैं और इसे गर्मी के मौसम में पेड़ से तोड़ा जाता है। पहले गर्म तेल में सूखी लाल मिर्च और लहसुन को तला जाता है और फिर इसमें कोलियारी भाजी के पत्ते को डाल दिया जाता है। फिर इसमें भिगोए हुए चने मिलाए जाते हैं। कोलियारी भाजी को पांच से छह मिनट तक पकाने के बाद इसमें नमक और हल्दी मिलाई जाती है फिर हल्की आंच में इसे दस मिनट के लिए पकने के लिए छोड़ दिया जाता हैं।