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दूसरमन म दोस खोजइयामन के कमी नइए

सत्ता पाइन तहां ले सब उल्टा बोले बर धर लेथें। जेन बात बर दूसर पारटी के सरकार ल कोसंय, उही बात ल अपन सासन म बने काहत नइ थकत हें। जनता के आंखीं म पट्टी बांधे के काम करत हें। जनता ह सब जानथे। समे आथे त अपन ताकत ल बताथे। तभे तो वोमन सत्ता पाइन हे।

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दूसरमन म दोस खोजइयामन के कमी नइए

दूसरमन म दोस खोजइयामन के कमी नइए

छत्तीसगढ़ी व्यंग्य


संत कबीर के दोहा हे ‘निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय, बिन पानी, साबुन बिना, निरमल करे सुभाय। यानी जउन मनखे हमर निंदा करथे, वोला अपन तीर म रखे बर चाही। काबर के वोहा तो बिना साबुन अउ पानी के हमर कमीमन ल बताके हमर सुभाव ल साफ करथे। फेर, अइसन होवत दिखई नइ देवय। काबर के लोगनमन निंदा-चारी करइया ल अपन तीर म ओधन नइ देवय। वोला देखते भडक़ जथें। वोकर से झरगा करे बर धर लथें।

दूसर म दोस ढूंढई मनखे के सुभाव हे। अब देखव ना, आजकाल जेमन सत्ता म हे अउ जेमन सत्ता म नइए, दूनों दल इही काम करत हावंय। जेमन अभी सत्ता म हावंय वोमन अपन सबो कमीमन बर दोस पहिली सत्ता म रिहिन तेकर ऊपर थोपत हावंय अउ जेमन सत्ता ले उतर गे हे, वोमन ल नवा सासन म कुछु गुन नजर नइ आवत हे।

एकठिन मजेदार किस्सा हे। बीरबल बोलिस- आलमपनाह, मनखे के जुन्ना आदत हे कि वोहा हर जिनिस म कभी खोजथे। अकबर कहिस- थोकिन फोरिया के बता, करके दिखा। बीरबल ह चउंक म एकठिन बढिय़ा फोटो लगवा दिस अउ कहिस के ए फोटो म कोन-कोन जगा खराबी हे, कमी हे, उहां निसान लगा दव। फोटो ल बिहनिया टंगवाय गिस अउ सांझकन उतरवा के बादसाह ल देखाइस। बादसाह ह अचरज म पड़ गे के पूरा फोटो ह गंदा होगे रिहिस हे। हर अवइया-जवइया ह वोमा कमी खोजके निसान लगा दे रिहिस। दूसर दिन फेर चउंक म दूसर फोटो टंगवइस। ए पइत लिखे रिहिस कि ए फोटो म जउन भी अच्छाई हावय, वोला बतावव। कोनो ह वो फोटो कोती देखिन घलो नइ।

कांगरेस के सासन म महंगई ह जनता के अब्बड़ कनिहा तोडि़स, फेर अब कांगरेस ल सबो जगा महंगई दिखई देवत हे। वोती भाजपा ह हर बात बर कांगरेस ल दोसी बतावव हे। इहां तक के पेटरोल, डीजल, रसोई गैस के बाढ़े दाम बर घलो कांगरेस ल दोस देवत हें।

सत्ता पाइन तहां ले सब उल्टा बोले बर धर लेथें। जेन बात बर दूसर पारटी के सरकार ल कोसंय, उही बात ल अपन सासन म बने काहत नइ थकत हें। जनता के आंखीं म पट्टी बांधे के काम करत हें। जनता ह सब जानथे। समे आथे त अपन ताकत ल बताथे। तभे तो वोमन सत्ता पाइन हे। जनता कहत हे-सत्ताधारीमन ल हवा म नइ उड़ाय बर चाही। अउ, सत्ता ले बाहिर बइठइयामन ल मान-मरयादा म रहे बर चाही। सत्ता म रहे ले कोनो दूध के धोवाय नइ हो जाए।

जब मनखे गलती के पुतला हे। कमी सबो म होथे। फेर, सत्ता के अपन मिजाज होथे। कोनो पारटी ह सत्ता ल नइ छोड़े बर चाहय। देस-समाज म आज जउन हालत हे, समस्या हे, वोकर बर सत्ता के अहम ह सबले जादा दोसी हे। तभे ले कोनो सत्ता के अहम ल नइ छोड़त हें, त अउ का-कहिबे।