28 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

कैसे संवरेगा देश का भविष्य! दो शिक्षक के भरोसे स्कूल के सैकड़ो छात्र, अंधेरे में बच्चों का भविष्य

बच्चे आने वाले कल के भविष्य हैं. इन पर देश का भविष्य टिका है. ऐसे में जरूरी है कि बच्चों को अच्छी शिक्षा और बेहतर सीख दी जाए. लेकिन जब स्कूल में शिक्षक ही ना हो, तो देश और बच्चों का भविष्य का क्या होगा. छत्तीसगढ़ के कसडोल विकासखंड के एक सरकारी स्कूलों का भी हाल कुछ ऐसा ही है.

less than 1 minute read
Google source verification
.

कैसे संवरेगा देश का भविष्य! दो शिक्षक के भरोसे स्कूल के सैकड़ो छात्र, अंधेरे में बच्चों का भविष्य

कसडोल विकासखंड से 17 किलोमीटर दूरी पर जंगल क्षेत्र में बसे ग्राम चिखली के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला स्कूल में पिछले पांच साल से शिक्षकों की कमी है. इसके चलते बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है.

ग्राम सरपंच कन्हैया पटेल ने बताया कि ब्लाक शिक्षाधिकारी से लेकर जिला स्तर तक आवेदन दिया गया, लेकिन अभी तक शिक्षकों की कमी को पूरा नहीं किया गया. शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चिकली में छात्र-छात्राओं की दर्ज संख्या 121 है और शिक्षक केवल दो प्रभारी प्रधान पाठक मनहरण लाल पटेल और शिक्षक धीर सिंह ठाकुर इन दोनों के भरोसे स्कूल चल रहा है. ये दोनों शिक्षक आर्ट के हैं, जो हिंदी, सामाजिक विज्ञान और संस्कृत पढ़ाते हैं. मुख्य विषय अंग्रेजी गणित और विज्ञान के लिए कोई शिक्षक नहीं है ऐसे में बच्चों का भविष्य अंधकार में हो गया है.

शिक्षकों की कमी पर जब जिला शिक्षा अधिकारी बलोदा बाजार और विकासखंड शिक्षा अधिकारी कसडोल द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया गया तो मजबूर होकर सरपंच ने ग्राम के ही एक होनहार युवक अजय पटेल को अंग्रेजी विषय बढ़ाने के लिए अपने खर्चे पर नियुक्त किया है.

शाला प्रबंधन समिति द्वारा ग्राम के ही एक युवक यशवंत को विज्ञान विषय पढ़ाने के लिए 3500 रुपए में लगाया गया है. स्कूल के प्रधान पाठक मनहरण लाल पटेल ने जब देखा की बच्चों का भविष्य शिक्षकों के बगैर अंधकार में हैं, तो उन्होंने उसी स्कूल में पढ़े एक होनहार छात्र थान सिंह केवट जो वर्तमान में ग्यारहवीं का छात्र है को गणित विषय पढ़ाने के लिए सहयोग स्वरूप मनाकर शिक्षा व्यवस्था को सुचारू रूप से जारी रखे हुए हैं.

Story Loader