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इस गीत को गाने पर जिंदगीभर रहा लताजी को मलाल

स्मृति-लता दीदी कार्यक्रम में जुटे संगीतप्रेमी, गीतों से दी श्रद्धांजलि और उनके जीवन से जुड़ी यादों को साझा किया

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इस गीत को गाने पर जिंदगीभर रहा लताजी को मलाल

इस गीत को गाने पर जिंदगीभर रहा लताजी को मलाल

रायपुर।सुर सामाग्री लता मंगेशकर ने विभिन्न भाषाओं में हजारों गाने गाए लेकिन एक गाना उन्हें बिल्कुल भी रास नहीं आया। इतना कि उन्होंने वह फिल्म कभी नहीं देखी। गीत के बोल हैं मैं क्या करूं राम मुझे बुड्ढा मिल गया। फिल्म है संगम। लता जी इस गीत को गाना नहीं चाहती थीं लेकिन राजकपुर के निवेदन के सामने वे मना नहीं कर पाईं। लताजी को गीत को गाने से इतना मलाल था कि वे संगम फिल्म कभी नहीं देखी जबकि वे अपने गाए गीतों वाली हर फिल्म देखा करती थीं। यह बताया मुकेश शाह ने। बंगाली कालीबाड़ी समिति सुर विरासत की ओर से परिसर स्थित हॉल में स्मृति लता दीदी का आयोजन बुधवार रात रखा गया। लता मंगेशकर के निधन के बाद यह अपनी तरह का पहला कार्यक्रम था। संगीतप्रेमियों ने लता के गीतों को गाया और उनसे जुड़ी अपनी भावनाएं भी जाहिर की। कार्यक्रम का संचालन कर रहे मुकेश शाह ने लताजी के जीवन के कई अनछुए पहलुओं से लोगों को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि जब निधन की खबर आई तो मैं अपने दो मित्रों के साथ अंतिम संस्कार कार्यक्रम में जाना चाहता था। एयरलाइंस ट्रैवल वालों से बात भी हो गई थी। & टिकट थे। लेकिन पक्का करने के लिए तो वह भी सेलआउट हो गई। मेरा सपना था कि लताजी को जिंदगी में एक बार साष्टांग प्रणाम करूँ लेकिन अधूरा रह गया। कार्यक्रम में पद्मश्री भारती बन्धु, पारस चोपड़ा, संजय श्रीवास्तव, योगेश अग्रवाल, जीआर चौधरी, दीपक व्यास, राजशेखर बोस, राजेश मिश्रा ने अपने विचार रखे।

जल्दी फ़ोटो खींचिए नहीं तो आशीर्वाद अधूरा रह जाएगा

सिंगर जेपी शर्मा ने बताया कि लताजी से मेरी यादगार मुलाकात हुई थी। लगभग ढाई घण्टे मैं वहां था। मैं उन्हें टकटकी लगाए देखता ही रहा। जब बात फ़ोटो की आई तो वे मजाकिये लहजे में कहने लगीं कि जल्दी फ़ोटो खींचिए नहीं तो आशीर्वाद अधूरा रह जाएगा। यह मौका मुझे रामदास अग्रवाल के जरिए साल 201& में मिला था।

इन्होंने दी प्रस्तुति

कार्यक्रम में लता के गाए सभी तरह के गीतों की प्रस्तुति दी गई। आराधना नायक, लता त्रिपाठी, गौतम देवानानी, अजय कर्मोकर, मुकेश शाह, राजेश जैन, जे पी शर्मा,डॉ. जावेद अली राजीव जैन, शिशिर जैन, राज वर्मा।

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