
CG Election 2018: माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस की अनुमति के बिना नहीं जा सकेंगे नेताजी
राकेश टेम्भुरकर/रायपुर. आगामी विधानसभा चुनाव से पहले माओवादियों की बढ़ती सक्रियता ने पुलिस प्रशासन की नींद उड़ा दी है। हमले की आशंका के मद्देनजर पुलिस ने सभी राजनीतिक दलों को फरमान जारी कर दिया है कि वो बिना पूर्व सूचना के क्षेत्र के दौरे पर ना जाए। चुनाव में इससे पहले भी राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं और नेताओं पर हमले हुए हैं।
देश में होने वाले विधानसभा चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधियों और केंद्रीय नेताओं को माओवादी प्रभावित इलाकों में जाने से पहले पुलिस की इजाजत लेनी पड़ेगी। राज्य पुलिस ने माओवादी हमले की आशंका को देखते हुए सभी राजनीतिक दलों को अनिवार्य रूप से इसकी सूचना देने की हिदायत दी है, ताकि उन्हें किसी भी संभावित खतरे से बचाया जा सकें।
राज्य पुलिस के अफसरों का कहना है कि माओवादी मौके की तलाश में जुटे हुए हैं। सुरक्षा व्यवस्था में थोड़ी सी चूक भी महंगी पड़ सकती है। इसे देखते हुए सभी जिला पुलिस अधीक्षकों और स्थानीय थाना प्रभारियों को अलर्ट रहने के लिए कहा गया है। उनके क्षेत्र में होने वाले किसी भी तरह के आयोजन में सुरक्षा के चाक-चौबंद व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
निशाने पर हैं जनप्रतिनिधि
वन मंत्री महेश गागड़ा, स्कूल शिक्षा मंत्री केदार कश्यप, कांग्रेस विधायक देवती कर्मा सहित बस्तर क्षेत्र के अधिकांश जनप्रतिनिधि और स्थानीय नेता माओवादियों के निशाने पर हैं। इसे देखते हुए राज्य पुलिस ने उनकी सुरक्षा बढ़ा दी है। साथ ही प्रवास के दौरान उन्हें अतिरिक्तफोर्स भी मुहैया कराई जा रही है। मालूम हो कि 2013 में हुए विधानसभा चुनाव के पहले झीरम घाटी में माओवादियों ने बड़े हमले को अंजाम दिया, जिसमें कांग्रेस के दिग्गज नेता सहित 30 लोगों की मौत हो गई थी।
सूचना देना जरूरी...
पुलिस मुख्यालय डीआईजी पी सुंदरराज ने कहा कि जनप्रतिनिधियों और केन्द्रीय मंत्रियों को संबंधित इलाके में दौरे में जाने से पहले स्थानीय पुलिस अधीक्षक और महानिरीक्षक को अनिवार्य रूप से सूचना देनी होगी। इसके आधार पर उनकी सुरक्षा के बंदोबस्त किए जाएंगे। माओवादी मौके की तलाश कर रहे हैं बिना सूचना के जाने पर उनकी जान को खतरा हो सकता है।
यह है जनप्रतिनिधियों का कहना
दंतेवाड़ा की कांग्रेसी विधायक देवती कर्मा ने बताया कि उनके विधानसभा क्षेत्र में पिछले काफी समय से माओवादियों को देखा जा रहा है। जिला मुख्यालय से 5 किलोमीटर दूर ही उन्हें देखे जाने की सूचना ग्रामीणों द्वारा दी गई है। ऐसी स्थिति में वो कभी भी किसी पर भी हमला कर सकते हैं। उधर, बिंद्रानवागढ़ के भाजपा विधायक एंव संसदीय सचिव गोर्वधन मांझी ने बताया कि ओडिशा की सीमा से सटे होने के कारण अक्सर माओवादियों की आमदरफ्त होती रहती है। नगरी, कालाहांडी और कोरापुर का इलाका संवेदनशील है। इसे देखते हुए अपने विधानसभा क्षेत्र में जाने से पहले पुलिस को 24 घंटे पहले ही सूचना देते हैं। उनकी अनुमति मिलने के बाद ही प्रभावित इलाके में जाते हैं।
भीड़ का लाभ उठाकर घटना को अंजाम दे सकते हैं माओवादी
राज्य पुलिस विधानसभा चुनाव के दौरान किसी भी तरह का खतरा मोल नहीं लेना चाहती। माओवादियों के पिछले काफी समय से बैकफुट में जाने के बाद एक बार फिर उनके सक्रिय होने के इनपुट मिलने के संकेत मिलते ही विभागीय अफसर भी सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों में जुटे हुए हैं। गौरतलब है कि आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान कई राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और वीआइपी अतिथियों का आगमन होगा। इस दौरान जनसंपर्क अभियान और सभाओं में भीड़ का लाभ उठाकर वह किसी भी अनहोनी घटना को अंजाम दे सकते हैं।
राज्य के 14 जिले माओवाद प्रभावित
छत्तीसगढ़ के कुल 27 जिलों में 14 जिले माओवादी समस्या से प्रभावित हैं। इसमें सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, कोंडागांव, कांकेर, नारायणपुर, राजनांदगांव, बालोद, धमतरी, महासमुंद, गरियाबंद, बलरामपुर और कबीरधाम जिला शामिल है। गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने माओवादियों के मूवमेंट और राज्य पुलिस की रिपोर्ट की समीक्षा करने के बाद 2017 में सरगुजा संभाग के जशपुर और कोरिया जिले को माओवादी हिंसा से प्रभावित जिले से हटा दिया था। साथ ही कबीरधाम जिला को इस सूची में जोड़ा गया था।
Published on:
04 Oct 2018 01:49 pm
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