टीके पर सियासत तेज: CM बोले - राज्य में 1 से प्रतिशत कम वैक्सीन हुई बर्बाद, केंद्र के आंकड़े भ्रामक

केंद्र और राज्य सरकार के बीच शुरू हुआ वैक्सीन (Vaccine) की बर्बादी (वेस्टेज) का विवाद जारी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों को भ्रामक बताते हुए कहा कि केंद्र राजनीति कर रही है।

By: Ashish Gupta

Published: 28 May 2021, 02:25 PM IST

रायपुर. केंद्र और राज्य सरकार के बीच शुरू हुआ वैक्सीन की बर्बादी (वेस्टेज) का विवाद जारी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (CM Bhupesh Baghel) ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों को भ्रामक बताते हुए कहा कि केंद्र राजनीति कर रही है। केंद्र में दाहिने हाथ को पता नहीं कि बायां क्या कर रहा है? इस पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदेव साय ने पलटवार किया, कहा कि यहां मुख्यमंत्री क्या कर रहे हैं स्वास्थ्य मंत्री को पता नहीं रहता और स्वास्थ्य मंत्री क्या करते हैं मुख्यमंत्री को पता नहीं रहता। स्वास्थ्य मंत्री को तो बैठकों तक में नहीं बुलाया जाता।

मुख्यमंत्री 48 दिन बाद (9 अप्रैल को पहली डोज लगवाई थी) कोरोना की दूसरी डोज लगवाने पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि कोरोना और टीकाकरण संबंधित हर रिपोर्ट राज्य से ही केंद्र को जाती है, जब राज्य में वैक्सीन की बर्बादी 1 प्रतिशत से कम है, जिसके प्रमाण भी केंद्र को दिए गए तो फिर केंद्र को क्या ऐसे भ्रामक आंकड़े जारी नहीं करने चाहिए।

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मुख्यमंत्री यहीं नहीं रूके, उन्होंने कहा कि हमें लिखित सूचना मिलती कि जून से पहले कोई डोज नहीं मिलेगी, मगर अगले ही दिन 2 लाख डोज की आपूर्ति हो जाती है। कहते हैं कि 18 प्लस वालों के लिए वैक्सीन है, फिर कहते हैं कि नहीं 45 से आयुवर्ग वालों के लिए है। बता दें कि केंद्र की रिपोर्ट में राज्य में 30.2 प्रतिशत वैक्सीन वेस्टेज बताया गया है। सूत्रों के मुताबिक राज्य स्वास्थ्य विभाग ने इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद दोबारा से 27 मई को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को अपडेज डेटा भेजा है।

वे हमारे एप को नहीं मान रहे
राज्य के 18 से 44 आयुवर्ग के नागरिकों के रजिस्ट्रेशन लिए सीजी टीका पोर्टल बनाया गया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि केंद्र हमारे इस पोर्टल को मान्य नहीं रही है। इस वजह से भी वे आंकड़े अधिक बता रहे हैं।

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यूटिलाइजेशन फीचर से खड़ा हुआ पूरा विवाद
केंद्र सरकार ने वैक्सीन की बर्बादी का जो डेटा जारी किया है दरअसल उसके पीछे यूटिलाइजेशन फीचर वजह है। राज्य स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक 15-20 दिन पहले केंद्र सरकार ने रोजाना प्रत्येक टीकाकरण केंद्रों में टीकाकरण खत्म होने के बाद टीके के पूरे हिसाब-किताब के लिए इस फीचर को लागू किया ताकि उन्हें रोजाना की जानकारी सीधे केंद्रों के जरिए मिले।

मगर, इसमें टीकाकरण केंद्र के ऑपरेटर्स ने एंट्री करने में गलती कर दी। इन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। बतौर उदाहरण, किसी केंद्र में 100 में 88 टीके लगे और बचे 12 तो एंट्री हुई 12 लगे 88 बचे। यहां 8 डोज की बर्बादी काउंट हो गई। क्योंकि 1 वाइल में 10 डोज होते हैं, इनका इस्तेमाल 4 घंटे के अंदर ही किया जाना है।

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की बस इतनी गलती थी कि उन्होंने 21 मई को राज्य द्वारा बताए जाने के बाद भी एंट्री यूटिलाइजेशन पोर्टल के डेटा को सही मानकर इसे सार्वजनिक कर दिया, राज्य से बात नहीं की। जबकि राज्य ने अपनी तरफ से स्पष्ट कर दिया था कि 30.2 प्रतिशत नहीं बल्कि 1 प्रतिशत से कम वैक्सीन की बर्बादी हुई है। (जैसा की पत्रिका को स्वास्थ्य विभाग के एक जिम्मेदार अधिकारी ने बताया।)

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